जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग में शुक्रवार को सेना के अभियान में मारे गए आतंकियों के निशाने पर अमरनाथ यात्रा थी. टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक ये आतंकी इस्लामिक स्टेट की जम्मू-कश्मीर (आईएसजेके) शाखा के सदस्य थे जो अमरनाथ यात्रा पर हमले की योजना बना रहा था. हालांकि उससे पहले ही सुरक्षाबलों ने अब तक समूह के छह आतंकियों को मार गिराया है. जम्मू-कश्मीर पुलिस के डीजीपी एसपी वैद का कहना है कि इस समूह में आठ-दस से ज्यादा आतंकी नहीं हैं.

रिपोर्ट के मुताबिक आईएसजेके इस्लामिक स्टेट के ‘पूरी दुनिया में जिहाद’ करने के मॉडल पर काम करता है. गृह मंत्रालय के एक सूत्र ने बताया कि आईएस और आईएसजेके के बीच एक प्रतीकात्मक संबंध लगता है जिसमें आईएस, आईएसजेके को अपने नाम पर हमले करने की सहमति देता है और आईएसजेके को इस कुख्यात आतंकी संगठन के नाम के चलते युवाओं के बीच लोकप्रियता मिलती है. अधिकारी ने बताया कि समूह को आईएस से किसी तरह की मदद (फंड और लॉजिस्टिक्स) नहीं मिलती. आतंकी गतिविधियों के एक विशेषज्ञ के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया है कि कि ऐसे छोटे आतंकी समूह हमलों की योजना बना रहे हैं लेकिन, संसाधन और स्थानीय समर्थन न होने की वजह से इनकी क्षमता सीमित है.

वहीं, एक और खबर के मुताबिक जम्मू-कश्मीर के 21 आतंकी सुरक्षाबलों की हिट लिस्ट में आ गए हैं. इसे शुक्रवार को हुए एनकाउंटर से ही जोड़ कर देखा जा रहा है जिसमें आईएसजेके के प्रमुख दाउद अहमद सलाफी समेत चार आतंकी मारे गए थे. जम्मू-कश्मीर में राज्यपाल शासन लागू होने के बाद इसे सुरक्षाबलों की बड़ी कामयाबी माना जा रहा है.

सुरक्षाबलों के सूत्रों का कहना है कि इन 21 आतंकियों को ढेर करने के लिए बड़े अभियान चलाए जा रहे हैं. इन मोस्ट वॉन्टेड आतंकियों में 11 हिजबुल मुजाहिदीन, सात लश्कर-ए-तैयबा, दो जैश-ए-मुहम्मद और एक गजवत उल-हिंद का है. एक सूत्र ने बताया कि अगर इन 21 आतंकियों को मार गिराया गया तो कई मामलों में काफी हद तक शांति आएगी और आतंकियों का नेतृत्व गड़बड़ा जाएगा जिसे दोबारा तैयार होने में समय लगेगा.’