हरियाणा सरकार ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में चंड़ीगढ़ की तरह एक नियोजित शहर विकसित करने की योजना बनाई है. द इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक गुड़गांव के नजदीक इस प्रस्तावित शहर का निर्माण निजी-सरकारी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल के तहत होगा. बताया गया है कि यह शहर करीब 50 हजार हेक्टेयर भू-क्षेत्र पर फैला होगा जो कि चंडीगढ़ की तुलना में करीब चार गुना बड़ा होगा.

इस शहर के बारे में एचआईआईडीसी के अतिरिक्त प्रबंध निदेशक नरहरि बांगड़ ने कहा है, ‘नियोजित रूप में बनने वाले इस शहर में जमीन के हर एक इंच का सही उपयोग हो इसका विशेष ध्यान रखा जाएगा. साथ ही इसमें जिसमें शिक्षा, स्वास्थ्य जैसी सभी बुनियादी और जरूरी सुविधाएं मौजूद होंगी.’

प्रस्तावित शहर से जुड़े दूसरे अधिकारियों का कहना है कि अन्य विकसित इलाकों से यहां तक की पहुंच का शुरू से ही विशेष ध्यान रखा जाएगा. इसके लिए इसे राष्ट्रीय और राज्य के राजमार्गों के अलावा कुंडली-मानेसर-पलवल (केएमपी) एक्सप्रेस वे के अलावा जिला सड़कों से भी जोड़ा जाएगा.

बताया गया है कि इस प्रस्तावित शहर का मास्टर प्लान तैयार करने के लिए हरियाणा स्टेट इंडस्ट्रियल एंड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (एचआईआईडीसी) को सलाहकार चुनने के लिए कहा गया है. माना जा रहा है कि सलाहकार तय किए जाने के बाद मास्टर प्लान संबंधी रिपोर्ट छह महीनों के भीतर आ जाएगी.

इसी अखबार ने सूत्रों के हवाले से यह भी लिखा है कि सलाहकार को अपनी रिपोर्ट में शहर की सामाजिक स्वीकार्यता के साथ पर्यावरण की अनुकूलता और वित्तीय व्यावहारिकता को भी शामिल करना होगा. साथ ही उसे सड़क व मेट्रो रेल जैसे परिवहन के साधनों के सा​थ दूसरी बुनियादी सुविधाओं का जिक्र भी अपनी रिपोर्ट में करना होगा.

उधर, हरियाणा प्रदेश के विपक्षी दलों ने इस प्रस्तावित शहर को लेकर सवाल उठाए हैं. उनका तर्क है कि किसी शहर की योजना विकसित करने की जिम्मेदारी ‘टाउन एंड कंट्री प्लानिंग डिपार्टमेंट’ और ‘हरियाणा विकास प्राधिकरण’ की होती है. ऐसे में एचएसआईआईडीसी को इसकी जिम्मेदारी क्यों सौंपी जा रही है?