दुबई में 15 भारतीयों को फांसी की सजा से बचा लिया गया है. इन सभी को शराब की अवैध बिक्री और हत्या के मामलों में दोषी ठहराया गया था. लेकिन दुबई के चर्चित व्यवसायी और समाजसेवी एसपी सिंह ओबेराय की मदद से इन्हें बचा लिया गया है. टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक एक भारतीय को छोड़ कर बाकी सभी अपने परिवारों के पास लौट आए हैं.

होटल कारोबारी एसपी सिंह ओबेराय इन सभी को मीडिया के सामने लेकर आए. उन्होंने कहा कि संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) जाने वाले पंजाबी युवाओं को शराब तस्करों के चंगुल से बचना सीखना चाहिए. एसपी सिंह ने बताया कि दुबई में शराब तस्करी को लेकर अलग-अलग गुटों में टकराव है. अगर इसमें किसी व्यक्ति की मौत हो जाती है तो यहां के कड़े कानून में दोषी के लिए फांसी की सजा है.

उन्होंने बताया कि अमृतसर के हरविंदर, नवांशहर के रणजीत सिंह, होशियारपुर के दलविंदर सिंह, पटियाला के सूचा सिंह और बिहार के छपरा जिले के धर्मेंद्र कुमार को शारजाह में फांसी की सुनाई गई थी. इन पर 2011 में वीरेंद्र चौहान नाम के व्यक्ति की हत्या का आरोप था जो उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ का रहने वाला था. वहीं, एक दूसरे मामले में पंजाब के 10 व्यक्तियों को अक्टूबर 2016 में फांसी की सजा दी गई थी. उन पर अाबू धाबी में पाकिस्तान के एक नागरिक मोहम्मद फरहान की हत्या करने का आरोप था.

एसपी सिंह ने बताया कि कैसे उन्होंने मृतकों के परिवारों से संपर्क किया और उन्हें दुबई के कानून के मुताबिक ब्लड मनी (गैर-इरादतन हत्या के मामले में पीड़ित के सगे-संबंधी को बतौर मुआवाजा दी जाने वाली रकम) लेने को राजी किया. उनके मुताबिक सरबत दा भला ट्रस्ट ने सभी भारतीयों को छुड़ाने के लिए बड़ी रकम का भुगतान किया. इसके बाद यूएई की अदालतों ने समझौता स्वीकार कर सभी भारतीयों को रिहा किया.