कांग्रेस पार्टी 2019 के लोक सभा चुनाव के लिए हर राज्य में अलग-अलग गठबंधन करेगी. यानी राष्ट्रीय स्तर पर भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाले एनडीए (राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन) से मुकाबले के लिए कोई गठबंधन नहीं होगा. राष्ट्रीय स्तर पर तस्वीर चुनाव बाद साफ होगी.

द हिंदू के मुताबिक कांग्रेस के मीडिया प्रभारी रणदीप सुरजेवाला ने साफ कहा है, ‘गठबंधन राज्य स्तर पर अलग-अलग होगा. हर राज्य में क्षेत्रीय पार्टियां हैं. उनसे उन्हीं के राज्य में ही गठबंधन संभव है. बाकी जगह स्थितियां भिन्न हैं. मिसाल के तौर पर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) और कांग्रेस का महाराष्ट्र में गठबंधन है. यह आगे भी जारी रहेगा. इस बाबत बातचीत अंतिम चरण में है. लेकिन एनसीपी के साथ गठबंधन गुजरात में नहीं चल सकता. इसी तरह बिहार में हमने राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के साथ गठबंधन करने का फैसला किया है. लेकिन उसके साथ हम उत्तर प्रदेश का चुनाव नहीं लड़ सकते.’

कांग्रेस के नेतृत्व में विपक्षी पार्टियों को एकजुट करने की क़वायद कर रहे एनसीपी प्रमुख शरद पवार ने भी कह दिया है कि 2019 के लोक सभा चुनाव के लिए पहले से ‘महागठबंधन संभव नहीं है. यह न ही व्यावहारिक है.’ हिंदुस्तान टाइम्स के मुताबिक पवार ने कहा है, ‘हर राज्य में स्थिति अलग है. कर्नाटक, गुजरात, मध्य प्रदेश, राजस्थान, पंजाब में कांग्रेस प्रमुख पार्टी है. पर तमिलनाडु में डीएमके (द्रविड़ मुनेत्र कड़गम), ओडिशा में बीजेडी (बीजू जनता दल), पश्चिम बंगाल में टीएमसी (तृणमूल कांग्रेस) आंध्र में टीडीपी (तेलुगुदेशम पार्टी), तेलंगाना में टीआरएस (तेलंगाना राष्ट्र समिति) जैसी कई क्षेत्रीय पार्टियां प्रमुख दल हैं.’

पवार के मुताबिक, ‘जिस राज्य में जो पार्टी मज़बूत है जाहिर तौर पर वहां वही गठबंधन की अगुवाई करेगी. यह संभव नहीं कि ये पार्टियां अपने राज्य में किसी राष्ट्रीय दल के नेतृत्व में गठबंधन की सहयोगी बनकर चुनाव में उतरें. इसीलिए हर राज्य में गठबंधन का स्वरूप अलग हो सकता है. फिर चुनाव के बाद उभरी तस्वीर के आधार पर गठबंधन का राष्ट्रीय स्वरूप तय किया जा सकता है. उस समय भाजपा विरोधी गठबंधन की संभावना ज़रूर मज़बूत रहेगी.’ हालांकि ममता बनर्जी जैसे कुछ नेताओं के बारे में ख़बर यह भी है कि वे गठबंधन के मुखिया के तौर पर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी का नेतृत्व स्वीकार करने को तैयार नहीं है.