भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले पिछले डेढ़ साल के निम्नतम स्तर पर पहुंच गया है. मंगलवार को एक डॉलर 68.25 रुपये का मिल रहा था, वहीं बुधवार को इसमें 0.62 प्रतिशत की गिरावट देखने को मिली. इसके चलते अब रुपया एक डॉलर के मुकाबले 68.68 रुपये हो गया है. खबरों के मुताबिक रुपया गिरने से भारत के लिए कच्चा तेल आयात करना और महंगा होने की आशंका जताई जा रही है. जाहिर है कि इसके चलते फिर महंगाई और देश का वित्तीय घाटा भी बढ़ेगा.

टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट में विदेशी मुद्रा और दरों के विशेषज्ञ सजल गुप्ता बताते हैं, ‘रुपये में इसी तरह गिरावट जारी रही तो शेयर बाजार से डॉलर निकल सकता है. इससे भारत पर व्यापार संतुलन रखने के लिए दबाव बढ़ सकता है.’ उधर, व्यापारियों का कहना है कि एक डॉलर की कीमत (लगभग) 69 रुपये होना एक संकटपूर्ण स्थिति है और जब तक आरबीआई इस मामले में आक्रामकता के साथ हस्तक्षेप नहीं करता तब तक रुपये का तेजी से गिरना जारी रह सकता है.

इस साल रुपये में करीब सात प्रतिशत की गिरावट आ चुकी है. इस मामले में पड़ोसी देशों के मुकाबले भारतीय रुपये की हालत सबसे ज्यादा खराब है और इसका असर आम लोगों पर पड़ने की आशंका है. रिपोर्टों के मुताबिक आने वाले दिनों में तेल कंपनियां पेट्रोल-डीजल की घरेलू कीमतों में और बढ़ोतरी कर सकती हैं. भारत बड़े पैमाने पर खाद्य तेलों और दालों का भी आयात करता है. रुपया कमजोर होने से घरेलू बाजार में इनकी भी कीमतें बढ़ सकती हैं.