तीन तलाक को अपराध की श्रेणी में लाने के बाद अब मोदी सरकार निकाह हलाला और बहुविवाह के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी में है. सूत्रों के हवाले से खबर है कि सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिकाओं का समर्थन कर मोदी सरकार मुस्लिम समाज की इन दोनों प्रथाओं को ‘असंवैधानिक’ करार देने की कोशिश करेगी. इस साल की शुरुआत में सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाओं पर सुनवाई करने के लिए हामी भर दी थी.

निकाह हलाला मुस्लिम समुदाय की एक विवादित प्रथा है. इसके मुताबिक अगर कोई तलाकशुदा दंपती दोबारा शादी करना चाहे तो ऐसा करने से पहले महिला को किसी और पुरुष से शादी करनी होगी. फिर महिला को उस व्यक्ति से संबंध बनाने के बाद तलाक लेना होगा. उसके बाद ही वह अपने पहले पति से शादी कर सकती है. महिला कार्यकर्ता लंबे समय से इस प्रथा का विरोध कर रही हैं. निकाह हलाला को नारीविरोधी और समाज को पिछड़ा बनाने वाली प्रथा बताते हुए उन्होंने इस पर प्रतिबंध लगाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की हुई है.

वहीं, सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में दायर याचिकाओं पर सुनवाई की मंजूरी देते हुए केंद्र सरकार और कानून मंत्रालय को नोटिस जारी किया था. उसने केंद्र को यह निर्देश भी दिया था कि वह मुस्लिम पर्सनल लॉ (शरीयत) के उन प्रावधानों को असंवैधानिक घोषित करे जो निकाह हलाला और बहुविवाह को मान्यता देते हैं.