कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर एक वीडियो खूब वायरल हो रहा है. इसमें यात्रियों से भरी एक ट्रेन के बहाने नरेंद्र मोदी सरकार की बुलेट ट्रेन परियोजना का मज़ाक़ उड़ाया गया है. वीडियो में कुछ महिलाएं व पुरुष यात्री एक खंभे के सहारे ट्रेन की छत से उतर रहे हैं. इस वीडियो के नीचे लिखा है, ‘बुलेट ट्रेन से नीचे उतरते हुए डिजिटल इंडिया के लोग.’

स्क्रीनशॉट
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यह वीडियो असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुसलमीन के नाम से चल रहे एक फ़र्ज़ी फ़ेसबुक पेज से शेयर किया गया है. वीडियो में लोगों का पहनावा भारतीयों जैसा ही है. हालांकि पाकिस्तान और बांग्लादेश में भी लोग इस तरह के कपड़े पहनते हैं. इसलिए सीधे यक़ीन करने से पहले इसकी जांच-पड़ताल ज़रूरी है.

ट्रेन के अंदर और ऊपर इतने सारे लोग हैं फिर भी वायरल वीडियो में कोई आवाज़ नहीं है. इससे भी शक पैदा होता है. थोड़ा और ग़ौर करने पर ज़्यादा ध्यान खींचता है ट्रेन के डिज़ाइन में इस्तेमाल किए गए रंग (हरा और पीला) और उस पर लिखी भाषा जो बांग्ला है. बांग्लादेश की ट्रेनों में ये रंग इस्तेमाल होते हैं.

इससे इस वीडियो के बांग्लादेश के होने की संभावना ज़्यादा बनती है. फ़ेसबुक पर सर्च करने के बाद इसकी पुष्टि भी हो गई. हमें उस व्यक्ति का नाम पता चला जिसने यह वीडियो बनाया और शेयर किया. खोजबीन के दौरान हमें एक दूसरे फ़ेसबुक पेज से यही वीडियो मिला, कुछ और जानकारी के साथ. इसमें वीडियो बनाने वाले का नाम दिया गया था. यह नाम है रुबायत तनवीर अन्नान.

अन्नान के फ़ेसबुक पेज के मुताबिक़ वे बांग्लादेश की सैन्य अकादमी में हैं. उन्हें क़रीब 2,000 लोग फ़ॉलो करते हैं. उन्होंने यह वीडियो 22 जून को अपनी टाइमलाइन पर डाला था. तब से अब तक 31 लाख लोग उनके पोस्ट को देख चुके हैं. हज़ारों बार इसे शेयर किया जा चुका है. वहां से जाने कितने फ़ेसबुक अकाउंटों से होते हुए यह भारत पहुंचा और यहीं का होकर रह गया. नीचे रुबायत तनवीर अन्नान का वह पोस्ट देखा जा सकता है. इसमें ऑडियो भी है.