भारत की पहली अंतरिक्ष वेधशाला ‘एस्ट्रोसैट’ ने पृथ्वी से 80 करोड़ प्रकाश वर्ष दूर एक आकाशगंगा की तस्वीर ली है. ‘एबेल 2256’ नाम की यह आकाशगंगा तीन आकाशगंगाओं के आपस में मिलने से तैयार हो रही है. टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के मुताबिक इन तीनों आकाशगंगाओं में भी 500 से अधिक आकाशगंगाएं हैं. ये सब मिलकर पृथ्वी की आकाशगंगा मिल्की वे से 1,500 गुना ज़्यादा विशाल आकाशगंगा का निर्माण करती हैं.

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने ‘एबेल 2256’ की जानकारी और इसकी पराबैंगनी (अल्ट्रावायलट) तस्वीरें जारी की हैं. खगोल विज्ञान के जानकारों के मुताबिक हमारी आकाशगंगा का आकार सर्पिल (स्पाइरल) है और ऐसी आकाशगंगाओं का रंग नीला होता है. ये निरंतर तारों का निर्माण करती हैं. वहीं, ‘एबेल 2256’ जैसी आकाशगंगाएं अंडाकार होती हैं. लाल रंग से पहचानी जाने वाली इन आकाशगंगाओं में पुराने तारे होते हैं. माना जा रहा है कि इसरो को मिली इस जानकारी से आकाशगंगाओं में होने वाले बदलावों को समझने में मदद मिलेगी.