अगले साल आम चुनाव से पहले मोदी सरकार किसानों की नाराजगी दूर करने की कोशिश करती हुई दिख रही है. बुधवार को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने खरीफ की फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) लागत से 50 फीसदी अधिक तय किया है. इस खबर को आज के अधिकतर अखबारों ने पहले पन्ने पर जगह दी है. धान के एमएसपी में 200 रुपये प्रति क्विंटल तक की वृद्धि की गई है. इसके अलावा दिल्ली पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला भी अखबारों की प्रमुख सुर्खियों में शामिल है. सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक पीठ ने बुधवार को साफ किया है कि दिल्ली के उपराज्यपाल अपने स्तर पर फैसला लेने के लिए स्वतंत्र नहीं हैं और उन्हें कैबिनेट की सलाह के अनुसार ही काम करना होगा.

दिल्ली पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का पुडुचेरी पर असर

दिल्ली को लेकर सुप्रीम कोर्ट के ताजा फैसले का असर सुदूर पुडुचेरी पर भी होता हुआ दिख रहा है. नवभारत टाइम्स की मानें को पुडुचेरी के मुख्यमंत्री वी नारायणसामी ने इस फैसले को इस केंद्र शासित प्रदेश में भी लागू करने की मांग की है. उन्होंने कहा है कि अगर ऐसा नहीं हुआ तो वे अदालत का दरवाजा खटखटाएंगे. दिल्ली की तरह ही पुडुचेरी की चुनी हुई नारायणसामी सरकार की उपराज्यपाल किरण बेदी के साथ टकराव चल रहा है. वहीं, मुख्यमंत्री ने किरण बेदी का नाम लिए बिना ही कहा, ‘जो भी काम सुप्रीम कोर्ट के दिए गए फैसले के विरोधाभासी होंगे, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी. मैं खुद इस फैसले के अनुसार काम न करने वालों के खिलाफ अवमानना (न्यायिक) की याचिका दायर करूंगा.’

एक पेड़ की बराबरी 10 पौधे कैसे कर सकते हैं? : दिल्ली हाई कोर्ट

दिल्ली हाई कोर्ट ने दक्षिणी दिल्ली में करीब 16,500 पेड़ों की कटाई को लेकर सख्त रुख अपनाया है. अमर उजाला की खबर के मुताबिक अदालत ने संबंधित एजेंसियों से पूछा है कि एक पौधा पेड़ की जगह कैसे ले सकता है. हाई कोर्ट की दो सदस्यीय पीठ ने इस मामले की सुनवाई के दौरान कहा, ‘आप (एजेंसियां) शहर को मरने के लिए नहीं छोड़ सकते. क्या काम शुरू करने से पहले पर्यावरण संबंधी कोई आकलन किया गया था?’ साथ ही, अदालत ने केंद्र और दिल्ली सरकार से पूछा है कि उन पौधों की सिंचाई कैसे की जाएगी जिन्हें क्षतिपूरक वनीकरण नीति के तहत लगाया जाना है. अदालत ने कहा कि एक पेड़ की बराबरी 10 पौधे कैसे कर सकते हैं. दिल्ली हाई कोर्ट ने कॉलोनियों की पुर्निविकास परियोजना के तहत पेड़ों की होने वाली कटाई पर 26 जुलाई तक रोक लगा दी है.

मध्य प्रदेश : दो बच्चों को भूख मिटाने के लिए पेड़ों की पत्तियां खानी पड़ीं

मध्य प्रदेश के सिवनी जिले में आर्थिक तंगी से जूझ रहे एक परिवार के दो बच्चों को भूख मिटाने के लिए पेड़ों की पत्तियां खानी पड़ीं. दैनिक जागरण में प्रकाशित खबर के मुताबिक पीड़ित परिवार को राशन सहित अन्य योजनाओं का लाभ नहीं मिल रहा था. गांव वालों ने बताया कि इससे जुड़ा वीडियो वायरल होने के बाद सरकारी कर्मचारियों ने घर में राशन रख दिया. बताया जाता है कि इससे दो दिन पहले परिवार के पास राशन के नाम पर कुछ भी नहीं था. अखबार की मानें तो इस परिवार के मुखिया ने बीते साल गरीबी की वजह से खुदकुशी कर ली थी. उधर, जिला अधिकारी गोपाल चंद डाड का कहना है कि पीड़ित परिवार को सरकारी योजनाओं का फायदा मिलना चाहिए था लेकिन, बैंक में खाता नहीं होने की वजह से यह नहीं हो पाया. उन्होंने इस परिवार को सरकारी मदद जल्द से जल्द देने की बात कही है.

2017-18 में एक लाख करोड़ रुपये के बकाया कर की वसूली

आयकर विभाग ने वित्तीय वर्ष 2017-18 में एक लाख करोड़ रुपये के बकाये की वसूली की है. यह बीते वित्त वर्ष के कुल प्रत्यक्ष कर संग्रह का 10 फीसदी है. बिजनेस स्टैंडर्ड की रिपोर्ट के मुताबिक विभाग ने संपत्तियों को सील करने जैसे कई उपाय किए जिससे बकाया कर और कर मांग की वसूली में 33 फीसदी का इजाफा हुआ. बताया जाता है कि बकाया कर वसूली के लिए चल और अचल संपत्तियों की पहली बार बिक्री की गई. साथ ही, इसे नहीं देने वालों वालों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया. आयकर विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि कुल प्रत्यक्ष कर संग्रह में बकाया कर की वसूली की बड़ा योगदान रहा है. उन्होंने कहा है कि चालू वित्त वर्ष में भी इस पर ध्यान दिया जाएगा.