मीडिया के विभिन्न माध्यमों पर लगातार आ रही फ़र्ज़ी ख़बराें से निर्वाचन आयोग भी परेशान है. उसका मानना है कि इस तरह की ख़बरें चुनावों को कई तरह प्रभावित करती हैं. लिहाज़ा इनको रोकने के लिए इस बार आयोग विशेष रणनीति बना रहा है. सूत्रों के मुताबिक आयोग की यह रणनीति इसी साल के अंत में होने वाले चार राज्यों के विधानसभा चुनाव के दौरान ख़ास तौर पर अमल में लाई जाएगी.

हिंदुस्तान टाइम्स से बातचीत में निर्वाचन आयोग के एक शीर्ष सूत्र ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, ‘हम फ़र्ज़ी ख़बरों के प्रसार को रोकने की क्षमता विकसित कर रहे हैं. ख़ास तौर पर उन ख़बरों को जो चुनाव के ठीक पहले उन्हें प्रभावित करने के मक़सद से प्रसारित की जाती हैं. अभी जैसे मीडिया के कई बड़े संस्थानों ने फैक्ट चैकर्स (फ़र्ज़ी ख़बरों का सच उजागर करने से संबंधित कार्यक्रम या सामग्री) का इस्तेमाल शुरू किया है उसी तरह हम भी इस तरह की ख़बरों को रोकने की प्रक्रिया अपनाने वाले हैं.’

इन अधिकारी ने बताया, ‘यूरोप के चुनाव आयोग का मॉडल हमारे सामने है. वे विषय और तकनीकी विशेषज्ञों की मदद से फ़र्ज़ी ख़बरों की पहचान करते हैं. इसी तरह फेसबुक और गूगल जैसी कंपनियों ने भी फर्ज़ी ख़बरों की पहचान के लिए एक तंत्र विकसित किया हुआ है. वह भी हमारे ध्यान में है. हम इन सभी को सामने रखते हुए अपना सैटअप विकसित करने की तैयारी कर रहे हैं. ऐसा करना हमारे लिए बेहद ज़रूरी है क्योंकि फ़र्ज़ी ख़बरें लगातार चुनाव के विभिन्न पहलुओं को प्रभावित कर रही हैं.’

ग़ौरतलब है कि इस साल मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान और मिज़ाेरम में विधानसभा चुनाव हैं. इनके ठीक बाद लोक सभा चुनाव का कार्यक्रम है. सुगबुगाहट यह भी है कि लोक सभा और अधिक से अधिक राज्यों की विधानसभाओं के चुनाव एक साथ करा लिए जाएं. ऐसे में फ़र्ज़ी ख़बरें रोकने के लिए चुनाव आयोग की तैयारी लाज़िमी है. उसे उम्मीद है कि चार राज्यों के विधानसभा चुनाव से पहले ही वह अपना तंत्र विकसित कर लेगा. यह अगले साल लोक सभा चुनाव में भी इस्तेमाल हो सकेगा.