​क्रिकेट में सट्टेबाजी को कानूनी बनाए जाने की सिफारिश की गई है. द प्रिंटडॉटइन के मुताबिक यह सिफारिश विधि आयोग ने की है. इस बारे में गुरुवार को सरकार को सौंपी गई एक रिपोर्ट में कहा गया है कि सट्टेबाजी को रोकने वाला कानून देश में असरदार नहीं साबित हुआ. ऐसे में सट्टेबाजी को श्रेणियों में बांटते हुए आधार या पैन कार्ड के साथ जोड़कर इसे नियमित किए जाने पर विचार किया जा सकता है.

आयोग की सिफारिश के मुताबिक सट्टा खेलने वाले का आधार या पैन कार्ड इसके साथ लिंक होगा तो सट्टेबाजी को काले धन से दूर रखा जा सकेगा. साथ ही अतिरिक्त सुरक्षा के लिए इसका पूरा लेन-देन नकदी रहित रखा जाएगा. इसके साथ ही विभिन्न आय वर्ग के लोगों के लिए उनकी आय के मुताबिक सट्टा खेलने की रकम भी तय की जाएगी. ऐसे लोग जो सरकार से सब्सिडी का लाभ हासिल करते हैं उन्हें सट्टे से दूर रखने की भी सिफारिश की गई है. आयोग का विचार है कि इसे नियमित किए जाने से सरकार को राजस्व के लिहाज से भी फायदा होगा.

हालांकि विधि आयोग के ही एक सदस्य व भारतीय विधि संस्थान के प्रोफेसर एस शिवकुमार ने इस सिफारिश पर अपनी असहमति जताई है. उनका तर्क है कि भारत एक गरीब मुल्क है और ऐसे में सट्टेबाजी को कानूनी जामा पहनाए जाने का यह ठीक समय नहीं है. उनका यह भी मानना है कि सट्टेबाजी को कानूनी बनाए जाने की सिफारिश करते हुए जस्टिस लोढा समिति ने शायद देश के सामाजिक और आर्थिक परिदृश्य पर ध्यान नहीं दिया.

भारत में सट्टेबाजी को नियमित करने की संभावनाओं का पता लगाने के लिए 2016 में सुप्रीम कोर्ट ने विधि आयोग को निर्देश दिए थे. देश में सट्टेबाजी को कानूनी बनाने के लिए क्रिकेट से जुड़ी जस्टिस आरएम लोढा समिति ने सिफारिश की थी. इस समिति का मानना था कि सट्टेबाजी को नियमित किए जाने से क्रिकेट के खेल को लाभ पहुंचेगा.