फन्ने खां की पहली झलक एक खास अंदाज में ‘झंकार ऑर्केस्ट्रा के फनकार’ कहते हुए मुख्य किरदार से आपका परिचय करवाती है. फन्ने खां में यह किरदार अनिल कपूर का है जो मुंबई की गलियों में भटक रहे उन अनगिनत सुपर-टैलेंटेड कलाकारों की झलक दिखाता है जो आज भी शायद एक मौके की तलाश में हैं. असर करने वाली कहानी के अलावा यह ट्रेलर देखते हुए आपको इस बात से भी थोड़ी खुशी होती है कि फन्ने खां अपने सुरीले मिजाज़ के साथ-साथ तंज वाले तेवर भी रखती है. फिल्म में ये तंज एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री के काम करने के तरीके, वर्ग-भेद और रूप-रंग को लेकर बरते जाने वाले दोहरे व्यवहार पर कसे जाने हैं.

फन्ने खां, साल 2000 में बेस्ट फॉरेन फिल्म कैटेगरी में ऑस्कर के लिए नामांकित होने वाली बेल्जियन फिल्म ‘एवरीबडी’ज फेमस’ की ऑफिशियल हिंदी रीमेक होने जा रही है. फन्ने खां बाप-बेटी की एक अनोखी कहानी दिखाती है. एक पिता जो अपने दौर में अपने सपने पूरे नहीं कर पाता, बेटी के टैलेंट को पहचानता है और किसी भी कीमत पर उसे सफल होते देखना चाहता है. इन दोनों के अलावा फिल्म का तीसरा मुख्य किरदार एक बेहद सफल गायिका का है. फन्ने खां इस गायिका की किडनैपिंग का प्लान बनाता है और फिर यह किडनैपिंग किस दिशा में जाती है और फिल्म को किस दिशा में ले जाती है, इसी पर फिल्म की दशा-दिशा भी टिकी लगती है. चकाचौंध से भरी फन्ने खां की इन झलकियों को देखते हुए एक ठीक-ठाक मनोरंजक फिल्म की उम्मीद तो जगती है लेकिन इसमें कहीं-कोई कमी रह जाने का एहसास भी बना रहता है.

बीते समय में ‘वेलकम-बैक’ ‘मुबारकां’ या ‘रेस-3’ जैसी फिल्मों के किरदारों से याद आने वाले अनिल कपूर एक लंबे वक्त बाद किसी ऐसी फिल्म में नजर आ रहे हैं जो गंभीरता से बनाई गई है. ‘दिल धड़कने दो’ के तीन साल बाद एक बार फिर उनके फैन्स यहां उन्हें एक अलहदा किरदार में अच्छा अभिनय करते देख सकते हैं. इसके अलावा ऐश्वर्या राय की अदाएं और खूबसूरती भी फिल्म को चर्चा देने का काम बखूबी करने वाली हैं. हमेशा की तरह वे थोड़ी मात्रा में ही एक्टिंग करेंगी, इसका पता भी ट्रेलर दे देता है. इसके अलावा फिल्म में राजकुमार राव, दिव्या दत्ता और पीहू सांद भी देखने लायक होंगे.

अब तक फिल्मों के एडिटोरियल डिपार्टमेंट से ताल्लुक रखने वाले अतुल मांजरेकर फन्ने खां से बतौर निर्देशक डेब्यू करने वाले हैं. उनकी यह फिल्म चाहे जैसी भी हो, लेकिन उन्हें इस बात का क्रेडिट अभी ही दिया जा सकता है कि वे अनिल कपूर को एक बार फिर वजनदार किरदार और वैसे ही अभिनय के ट्रैक पर ले आए हैं. वहीं मांजरेकर की इस फिल्म का संगीत भी खासा पॉपुलर होने वाला है, खासतौर पर नुसरत फतेह अली खान का गाया ‘ये जो हल्का-हल्का सुरूर है’ की झलक सुनकर तो यह बात पूरा जोर लगाकर कही जा सकती है. बाकी, फन्ने खां की फनकारी दर्शकों को कितना प्रभावित कर पाएगी इसका पता तीन अगस्त को फिल्म रिलीज के साथ ही चलेगा.

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