हाल ही में हुए एक अध्ययन से पता चला है कि 50 फीसदी से ज्यादा एप आपके मोबाइल से निजी जानकारी चुरा रहे हैं. बोस्टन की नॉर्थ-ईस्टर्न यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने अपने इस अध्ययन में यह भी पाया है कि कुछ एंड्रॉयड एप्स गुप्त रूप से मोबाइल स्क्रीन को रिकॉर्ड कर यूजर का डेटा थर्ड पार्टी के साथ साझा कर रहे हैं.

करीब सालभर चले इस अध्ययन में करीब 17,260 सबसे लोकप्रिय एंड्रॉयड एप्स को शामिल किया गया था. शोधकर्ताओं के मुताबिक उन्होंने इन एप्स को 10 स्मार्टफोन में इंस्टॉल करके इनका परीक्षण किया. परीक्षण में पता चला कि फेसबुक सहित 8,000 से अधिक एप्स फेसबुक या अन्य डेटा एनालिटिक्स से जुड़ी कंपनियों को यूजर की जानकारी भेज रहे थे.

इस अध्ययन से जुड़ी एक विशेषज्ञ ने मीडिया को बताया है, ‘हमने अपने अध्ययन में दोनों तरह के एप्स को शामिल किया था, एक वे जो यूजर से इमेज, कैमरा आदि तक पहुंच के लिए इजाजत मांगते हैं और दूसरे वे जो ऐसा नहीं करते या इसकी उन्हें जरूरत नहीं पड़ती. दोनों ही तरह के एप्स बहुत कुछ ऐसा कर रहे हैं, जो मोबाइल यूजर की निजता के लिए खतरनाक है.’

अध्ययन कैसे किया गया

इस अध्ययन से जुड़े शोधकर्ताओं ने एप्स की इस चोरी को पकड़ने के लिए एक विशेष सॉफ्टवेयर प्रोग्राम बनाया था जो उन फाइलों को ट्रैक करता था जिन्हें एप के द्वारा किसी तीसरे सोर्स को भेजा जा रहा था. उदाहरण के तौर पर इस प्रोग्राम के जरिये पता लगा कि मशहूर फूड डिलेवरी एप ‘गो-पफ’ यूजर की स्क्रीन को रिकॉर्ड कर इसे मोबाइल एनालिटिक्स कंपनी ‘एपसी’ को भेज रही थी. अध्ययन में ये भी पाया गया कि जो स्क्रीन शॉट्स या वीडियो एपसी को भेजे जा रहे थे उनमें मोबाइल यूजर्स के प्राइवेट मैसेज और निजी जानकारी भी शामिल थी. इस खुलासे के बाद गो-पफ ने अपनी एप से संबंधित सुरक्षा नीति को अपडेट करने की बात कही है.

नॉर्थ-ईस्टर्न यूनिवर्सिटी के इस शोध में शामिल शोधकर्ताओं ने एक और भी बात बताई है. इनके मुताबिक इस अध्ययन का एक मकसद एप्स द्वारा मोबाइल यूजर की बातचीत को भी रिकॉर्ड करने के बारे में पता करना था. हालांकि, इस दौरान उन्हें ऐसा कोई एप नहीं मिला जिसके द्वारा यूजर की बातचीत को रिकॉर्ड करने का प्रयास किया जा रहा हो.