अमेरिकी नौसेना के इतिहास में भ्रष्टाचार के सबसे बड़े मामले में भारतीय मूल की महिला गुरशरण कौर शेरों रैशेल को सिंगापुर में तीन साल की सजा सुनाई गई है. गुरशरण कौर 57 साल की हैं. सिंगापुर में ही रहती हैं और अमेरिकी नौसेना से जुड़ी रही हैं.

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक गुरशरण कौर अमेरिकी नौसेना में अनुबंध विशेषज्ञ थीं. अमेरिकी नौसैनिक जहाजों के रखरखाव से संबंधित करोड़ाें डॉलर के ठेकों का प्रबंधन करना उनकी ज़िम्मेदारी में शुमार था. इसके लिए वे अनुबंध की पात्रताओं-आवश्यकताओं का मसौदा तैयार करती थीं. इसके बाद ठेका हासिल करने की दावेदार कंपनियों से बातचीत और सौदा तय करने के लिए मोलभाव का जिम्मा भी उनके ही पास था. बताया जाता है कि 2006 से 2013 के बीच उन्होंने अपनी इन अधिकारों का दुरुपयोग किया.

गुरशरण पर आरोप है कि उन्होंने अमेरिकी नौसेना की कई संवेदनशील जानकारियां लीक कीं. नौसेनाओं को सेवाएं उपलब्ध कराने वाली कंपनी- ग्लेन डिफेंस मैरीन (एशिया) (जीडीएमए) के मलेशियाई मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) लियोनार्द ग्लेन फ्रांसिस को उन्होंने ख़ास तौर पर सूचनाओं का लाभ पहुंचाया. इन सूचनाओं की मदद से जीडीएमए को करीब पांच करोड़ डॉलर के अमेरिकी नौसेना के 11 ठेके हासिल हुए. जबकि इन सूचनाओं के एवज़ में गुरशरन को 1,30,278 मलेशियाई डॉलर की रिश्वत दी गई.

इस मामले में सिंगापुर के जिला जज शैफुद्दीन सरुवान ने गुरशरण को भ्रष्टाचार के तीन मामलों का दोषी मानते हुए सजा सुनाई. साथ ही आदेश दिया के आरोपित ने जितनी रकम रिश्वत के तौर पर हासिल की है वह पूरी की पूरी सिंगापुर के भ्रष्ट आचरण जांच ब्यूरो (सीपीआईबी) को सौंप दी जाए. ख़बरों के मुताबिक अमेरिकी नौसेना में भ्रष्टाचार के इस मामले का ख़ुलासा 2012 में हुआ था जब जीडीएमए जांच के केंद्र में आई थी. जबकि गुरशरण को दो साल पहले भ्रष्टाचार के मामलों में आरोपित बनाया गया था.