जम्मू-कश्मीर के दो बड़े अलगाववादी नेताओं- यासीन मलिक और मीरवाइज़ उमर फारूक़ को पुलिस ने हिरासत में ले लिया है. ख़बरों के मुताबिक हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के नेता फारूक़ को उनके घर में नज़रबंद किया गया है. जबकि जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट के नेता मलिक को पुलिस थाने ले जाकर ऐहतियात के तौर पर हवालात में बंद कर दिया गया है.

बताया जाता है कि आठ जुलाई को हिज़्बुल मुजाहिदीन के आतंकी बुरहान वानी की बरसी पर अलगाववादियों की ओर से आयोजित किए जाने वाले संभावित कार्यक्रमों के मद्देनज़र ये ग़िरफ़्तारियां की गई हैं. अलगाववादियों ने इस बार रविवार को वानी की बरसी पर कश्मीर बंद की अपील की है. यह अपील करने वाले नेताओं में फारूक़ और मलिक के अलावा सैयद अली शाह गिलानी भी हैं. गिलानी विभिन्न अलगाववादी संगठनों के संयुक्त मंच- ज्वाइंट रेज़िस्टेंस लीडरशिप (जेआरएल) के मुखिया हैं.

ग़ौरतलब कि वानी को आठ जुलाई 2016 को अनंतनाग में हुई एक मुठभेड़ में मार गिराया गया था. उसके बाद महीनों तक घाटी में विरोध प्रदर्शन और पत्थरबाज़ी की घटनाएं होती रहीं. प्रदर्शनकारियों पर ज़वाबी कार्रवाई के दौरान 90 आम नागरिक मारे गए थे. जबकि 4,000 से अधिक घायल हो गए थे.

उधर एक अन्य मामले में अलगाववादी नेता आसिया अंद्राबी को दिल्ली की अदालत ने 10 दिन के लिए राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की हिरासत में सौप दिया है. समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक आसिया पर पाकिस्तान की मदद से देश के ख़िलाफ़ जंग छेड़ने का आरोप है. आसिया कश्मीर के अलगाववादी संगठन दुख्तरान-ए-मिल्लत की प्रमुख हैं. उनके इस संगठन पर पहले ही प्रतिबंध लगा हुआ है. एनआईए ने उनके और उनकी दो साथियों- सोफी फहमीदा और नाहिदा नसरीन के ख़िलाफ़ इसी अप्रैल में मामला दर्ज़ किया था. उसी वक़्त तीनों को जम्मू-कश्मीर पुलिस ने ग़िरफ़्तार भी कर लिया था.

एनआईए की अपील पर तीनों को दिल्ली की अदालत में पेश करने के लिए शुक्रवार को सख़्त सुरक्षा में श्रीनगर से लाया गया. यहां जिला जज पूनम ए बंबा की अदालत में उन्हें पेश किया गया. एनआईए ने तीनों से पूछताछ के लिए 15 दिन की हिरासत मांगी थी. लेकिन अदालत ने 10 दिन की हिरासत मंज़ूर की.