महबूबा जी, भाजपा ने आपकी सरकार से समर्थन वापस क्यों लिया?

क्योंकि अचानक भाजपा के आकाओं को याद आया कि वे समर्थन देने के लिए नहीं, लेने के लिए बने हैं! मेरे ख्याल से इस पार्टी का नाम भारतीय जनता पार्टी न होकर ‘भारत की वापसी पार्टी’ होना चाहिए! घर वापसी, अतीत वापसी, समर्थन वापसी... इससे अलग वे कर ही क्या रहे हैं भला. मुझे पूरा यकीन है कि एक दिन वे पूरे मुल्क को खूब पीछे वापस ले जाकर ही छोड़ेंगे.

क्या आपको लगता था कि भाजपा कभी पीडीपी से समर्थन वापस लेगी?

लगने से भला क्या होता है! लग तो ‘साहब’ की बड़ी-बड़ी बातों से यह भी रहा था कि इस बार हर हाल में पूरे मुल्क का विकास होकर ही रहेगा. लग रहा था कि मोदी जी को रोकने वाला तो भले ही कोई मिल जाए, पर विकास रोकने वाला कोई नहीं मिलेगा! बहुतों को यह भी लगने लगा था कि अब उनके खाते में सच में 15 लाख रुपये आ जाएंगे, पर यहां तो विकास खुद नीरव मोदी के लिए नोट गिनते हुए पकड़ा गया!

भाजपा द्वारा इतने गुपचुप तरीके से समर्थन वापसी का आपको क्या कारण लगता है?

उनके अतीत वापसी और घर वापसी आदि अभियानों पर इतना शोर मचने-मचाने के बाद उन्हें महसूस हुआ होगा कि अब बाकी वापसियां गुपचुप करने में ही भलाई है!

भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने आप पर जम्मू और लद्दाख क्षेत्रों के विकास की अनदेखी करने का आरोप लगाया है. इसके बारे में आपको क्या कहना है?

उन्होंने तो हमारे ऊपर सिर्फ ‘दो क्षेत्रों’ की अनदेखी का ही आरोप लगाया है. हम तो उनकी केन्द्र सरकार के ऊपर सिर्फ ‘दो-तीन लोगों’ का ही विकास करने और बाकी पूरे मुल्क के विकास की अनदेखी का आरोप लगा रहे हैं! अब इस पर आप उनसे पूछिये वे क्या कहना चाहते हैं.

क्या पीडीपी भविष्य में फिर से कभी भाजपा के साथ गठबंधन करेगी?

(मुस्कुराते हुए) देखिए अपना काम निकालने के लिए तो गधे को भी बाप बनाना पड़ता है, भाजपा तो फिर भी दुधारू गाय है...और दुधारू गाय किसी भी नस्ल की हो, उसकी लात पड़ना ज्यादा देर तक किसे याद रहता है!

भाजपा का यह भी आरोप है कि आपकी वजह से कश्मीर के हालात और ज्यादा बिगड़ गए हैं. इस पर आपका क्या कहना है?

मैंने तो सिर्फ एक ही राज्य के हालात बिगाड़े हैं, वहां एक इंसान सवा सौ करोड़ लोगों के हालात बिगाड़े हुए है. उस पर उन्हें कुछ नहीं कहना है! (खीजते हुए)

आपका इशारा किसकी तरफ है?

यदि नाम ही बताना होता तो फिर इशारा क्यों करती!

मेरा मतलब है कि आप कौन-से बिगड़े हुए हालात की बात कर रही हैं?

मुल्क के ज्यादातर लोग आंख बंद करके कभी पकौड़े तलने में पिल पड़ते हैं तो कभी ‘खिचड़ीचाल’ चलने लगते हैं... और आप पूछ रही हैं कि कौन-से बिगड़े हालात! (गुस्से से) आप लोगों को बिगड़े हुए हालात के नाम पर सिर्फ कश्मीर ही क्यों याद आता है? यदि आप लोग कश्मीर को बिगड़े हुए हालात का पर्याय मानने ही लगे हैं तो समझ लीजिए कि पूरा मुल्क कश्मीर बनने के कगार पर है!... ‘जन्नत के मजे’ बहुत दूर नहीं हैं आप लोगों से भी! (व्यंग्यभरी मुस्कान के साथ)

आपके पिता मुफ्ती मोहम्मद सईद ने भाजपा और पीडीपी के गठबंधन को उत्तर-दक्षिण ध्रुवों का मेल बताया था. आपका इस बारे में क्या कहना है?

भाजपा सिर्फ सत्ता से मेल करती है, बाकी तो सब घालमेल है.

महबूबा जी, देशभर के राजनीतिक परिवारों में आपको सबसे काबिल वारिस के तौर पर देखा जाता है. इसे आप किस तरह से देखती हैं?

(मुस्कुराते हुए) शुक्रिया. वैसे मेरा लक्ष्य ‘गैर-वारिस वालों’ से भी ज्यादा काबिल होना है.

क्या मतलब?

मेरा मतलब है कि सबसे काबिल होने में अभी काफी कसर बाकी है. सबसे काबिल होती तो शाहों के शाह द्वारा मेरे लिए फतवा निकालने से पहले मैं ही उन्हें फतवा न दे चुकी होती!

पीडीपी के विधायक इमरान रजा अंसारी ने आपके ऊपर भाई-भतीजावाद के आरोप लगाए हैं. इसके बारे में आप क्या कहेंगी?

मैं उनसे पूछना चाहती हूं कि भारत के एक हिस्से में राजनीति करते हुए मैं भारतीय राजनीति की बुनियादी खासियतों से भला दूर कैसे रह सकती हूं? भाई-भतीजावाद और वंशवाद में तो हमारी राजनीति की जड़ें हैं. क्या वे चाहते हैं कि मैं अपनी जड़ों पर ही वार करने लगूं!

क्या यह सच है कि जम्मू-कश्मीर में पीडीपी-भाजपा गठबंधन की सरकार गिरने के बाद अब पीडीपी टूटने के कगार पर है?

सिर्फ पीडीपी ही नहीं, गैर भाजपाई सरकार वाले सभी राज्यों में क्षेत्रीय पार्टियां टूटने के कगार पर हैं!

क्या मतलब?

मतलब यही कि भाजपा जब तक देश के सारे राज्यों में अपनी सरकार नहीं बना लेगी, वह किसी भी क्षेत्रीय पार्टी के विधायकों पर डोरे डालना बंद नहीं करेगी! मेरी पार्टी के टूटने की खबर उड़ना ही इस बात की तरफ इशारा करती है भाजपा ने यहां सरकार बनाने की कवायदें शुरू कर दी हैं. सो इस सवाल का जवाब मुझसे ज्यादा बेहतर तरीके से आपको शहंशाह दे सकते हैं! वे ज्यादा सटीक तरीके से बता देंगे कि पीडीपी कब टूटेगी? कितने विधायक छोड़कर जाएंगे?... यहां तक कि पार्टी से इस्तीफा वाले विधायक पीडीपी छोड़ने के क्या-क्या कारण गिनवाएंगे ये भी आपको छह दीनदयाल उपाध्याय मार्ग (दिल्ली में भाजपा का कार्यालय) से पता चल जाएगा! (खीजते हुए)

महबूबा जी, भाजपा से गठबंधन के समय आपने कहा था कि कश्मीर को कोई दलदल से निकाल सकता है तो वो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हैं. अब उस बारे में आपका क्या कहना है?

अब मैं समझ गई कि वे दलदल से निकालने वाले नहीं हैं, बल्कि पूरे कश्मीर में दलदल फैलाने की फ़िराक में हैं!...अब्ब्ब मेरा मतलब है कि बीच मझधार में छोड़ने वाले दलदल से क्या ही निकालेंगे भला!

भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव राम माधव का कहना है कि आपके नेतृत्व के दौरान घाटी में आतंकवाद, हिंसा और कट्टरता में आरी बढोत्तरी हुई है. इस पर आपकी क्या प्रतिक्रिया है?

देखिए हर राज्य के कुछ ऐसे बुनियादी मुद्दे होते हैं, जो कि न सिर्फ वहां की समस्या होते हैं बल्कि उस जगह की पहचान भी बन चुके होते हैं. इसी तरह आतंकवाद न सिर्फ कश्मीर की समस्या है बल्कि अब तो यह हमारी पहचान का भी अहम हिस्सा है. कश्मीर से यदि आतंकवाद ही खत्म हो गया तो फिर यहां बचेगा क्या? खाली पयर्टन! ...और रही बात कट्टरता की तो इस बारे में राम तो क्या ‘कृष्ण’ भी भाजपा के लिए बोलने का मुंह नहीं रखते!

एक अंतिम सवाल. क्या आपको लगता है कि जम्मू-कश्मीर के अच्छे दिन कभी आएंगे?

घाटी के पत्थरबाजों के अच्छे दिन आ गए तो बाकी लोगों के भी आ ही जाएंगे... और अगर नहीं आए तो हम पूरी घाटी को ही पत्थरबाजी में शरीक कर देंगे, ताकि कम से कम इस तरीके से ही लोग अच्छे दिन महसूस कर सकें!