पिछले हफ्ते विधि आयोग ने अपनी एक सिफारिश में कहा है कि अगर खेलों में सट्टेबाजी और जुए को पूरी तरह से प्रतिबंधित न किया जा सके तो फिर प्रभावी तरीके से इसका नियमन होना चाहिए. विधि आयोग द्वारा सट्टेबाजी और जुए को कानून के दायरे में लाने का यह सुझाव स्वागतयोग्य है.

सरकार अगर इस सुझाव को मान लेती है तो इससे कई तरह की आपराधिक गतिविधियों में कमी आएगी. इससे मनी लॉन्डरिंग और कर चोरी पर काफी हद तक लगाम लगेगी तो वहीं कर संग्रहण में भी भारी बढ़ोत्तरी होगी.

इस मसले पर विधि आयोग की राय जस्टिस लोढ़ा समिति की सिफारिशों से मिलती-जुलती है, जिसने कहा था कि क्रिकेट में सट्टेबाजी को वैधता मिलनी चाहिए और मैच फिक्सिंग को अपराध बना देना चाहिए.

1996 में सुप्रीम कोर्ट ने घुड़दौड़ में सट्टेबाजी को मान्यता देते हुए कहा था कि यह संयोग का खेल नहीं है, बल्कि इसमें चतुरई और कुशलता की जरूरत होती है. विधि आयोग ने सभी खेलों (वे खेल जिनमें कुशलता की जरूरत है) में सट्टेबाजी का नियमन करने का सुझाव देकर, खेलों के प्रति पूर्वाग्रह जताने वाली सोच खत्म करने का एक अच्छा काम भी किया है. सट्टेबाजी को अगर गैर-कानूनी गतिविधियों के दायरे से बाहर रखा जाता है तो इसमें पारदर्शिता आएगी और जो लोग अंडरग्राउंड होकर इसमें लगे हैं, उन तक पुलिस और अन्य एजेंसियां पहुंच आसान हो जाएगी.

सट्टाबाजी और जुआ राज्य के विषय हैं. गोवा और सिक्किम ने इनसे जुड़ी कई गतिविधियों को कानूनी मान्यता दी है. दूसरे राज्य भी इन दो छोटे राज्यों से सबक सीख सकते हैं. अगर सट्टेबाजी और जुए से जुड़ी गतिविधियां मीडिया प्लेटफॉर्मों के जरिए संचालित हों तो इसके लिए संसद एक मॉडल कानून बना सकती है और राज्य सरकारें अपने हिसाब से बदलाव करके इस कानून को लागू कर सकती हैं. हालांकि राज्यों के लिए यह ज्यादा आसान होगा कि वे पहले से मौजूद अपने कानूनों में सुधार करके सट्टेबाजी को वैधता दें.

इस समय घुड़दौड़ और लॉटरी से होने वाली आमदनी पर सीधे-सीधे 30 प्रतिशत टैक्स लगता है. वहीं डिस्ट्रीब्यूटर के कमीशन पर जीएसटी भी लागू होता है. एक अनुमान के मुताबिक सट्टेबाजी की अंडरग्राउंड गतिविधियां तकरीबन 3,00,000 करोड़ रुपये मूल्य की हैं. जाहिर है कि अगर इन गतिविधियों को वैधता दी जाती है तो यह क्षेत्र केंद्र और राज्यों के लिए कर वसूली के हिसाब से सोने का अंडा देने वाली मुर्गी साबित हो सकता है. वहीं कैसिनो जैसी गतिविधियों में विदेशी निवेश को अनुमति देकर पर्यटन और रोजगार के अवसर भी बढ़ाए जा सकते हैं. इस मामले में भारत को ब्रिटेन से सीखने की जरूरत है जहां पर्याप्त सतर्कता के साथ सट्टेबाजी और जुए के क्षेत्र के नियमन को लेकर बेहद कारगर व्यवस्था बनी हुई है. (स्रोत)