भारतीय जनता पार्टी भले खुले तौर पर इंकार कर रही हो लेकिन ऐसी ख़बरें लगातार आ रही हैं कि वह जम्मू-कश्मीर में अपनी सरकार बनाने की गंभीर कोशिशें कर रही है. साथ में यह भी कि रक्षाबंधन पर अमरनाथ यात्रा पूरी हो जाने के बाद इस सिलसिले में बड़ा ख़ुलासा हो सकता है. अलबत्ता कुछ जानकारियां इससे पहले ही छन-छनकर निकलने लगी हैं. इन्हीं में एक ये भी है कि भाजपा की कोशिशों की राह एक बड़ा रोड़ा भी है जिसे अब तक हटाया नहीं जा सका है.

द इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक पूर्व अलगाववादी नेता और अब भाजपा के समर्थक सज्जाद लोन इस वक़्त जम्मू-कश्मीर में उसके सबसे बड़े आसरा बने हुए हैं. बताया जाता है कि उन्हीं के नेतृत्व में ही महबूबा मुफ़्ती की पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी), कांग्रेस और नेशनल कॉन्फ्रेंस (एनसी) के असंतुष्ट विधायकों को एकजुट करने की कोशिश की जा रही है. तैयारी ये है कि लोन के नेतृत्व में इन असंतुष्टों का एक मोर्चा बना लिया जाए और इसके साथ मिलकर भाजपा जम्मू-कश्मीर में अपनी पहली सरकार बना ले.

पीडीपी के 28 में से 21 विधायक भाजपा के साथ सरकार बनाने को राजी बताए जाते हैं. इन्हीं में से एक कहते भी हैं, ‘अगर केंद्र राज्य में नई सरकार बनाना चाहता है तो बाकी सब चीजें बेमानी हैं. हमारे लिए ज्यादा कुछ करने काे बचता नहीं है. यह हमारे लिए ज़िंदगी-मौत की लड़ाई जैसा है. जनता हमसे नाराज़ है. आतंकी हमें जान से मारने की फिराक़ में हैं. ऐसे में हम दिल्ली को नाराज़ कैसे कर सकते हैं? इसीलिए अगर केंद्र यह भरोसा दे कि बाकी बचे ढाई साल राज्य में सरकार चलेगी तो नई सरकार बन सकती है.’

हालांकि सूत्रों की मानें तो इस दिशा मुख्यमंत्री पद का मसला सबसे बड़ा रोड़ा बनता हुआ दिखा रहा है. भाजपा की दलील है कि चूंकि संभावित गठबंधन में वह सबसे बड़ी पार्टी होगी इसलिए सरकार के मुखिया का पद उसे मिलना चाहिए. पार्टी के वार्ताकार इस पद पर अपना दावा छोड़ने को तैयार नहीं है. अलबत्ता मंत्रालयों के बंटवारे पर भाजपा झुकने को तैयार है. लेकिन असंतुष्ट विधायक भी अभी इसके लिए राजी नहीं हैं. वे दो विधायकों वाली पार्टी पीपुल्स कॉन्फ्रेंस (पीसी) के सज्जाद लोन काे मुख्यमंत्री पद पर देखना चाहते हैं.

सूत्रों के मुताबिक, ‘पीडीपी के असंतुष्ट विधायक ख़ास तौर पर अड़े हैं. उनकी दलील है कि आगे किसी मौके पर भाजपा का मुख्यमंत्री बनाया जा सकता है लेकिन अभी इसके लिए सही वक़्त नहीं है.’ लेकिन भाजपा के रणनीतिकारों को लगता है कि यही वह मौका है जब भाजपा मुस्लिम आबादी की बहुलता वाले इस राज्य में अपनी सरकार बना सकती है. इस बीच भाजपा की ओर से केंद्रीय मंत्री जीतेंद्र सिंह का नाम फिर राज्य के मुख्यमंत्री पद के लिए तेजी से उभरा है. हालांकि इस पर स्थिति तो कुछ दिनाें बाद ही स्पष्ट होगी.