केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने एक तरफ देश में बैंक ऑफ चाइना (बीओसी) की शाखाएं खोलने काे हरी झंडी दी है. दूसरी तरफ केंद्रीय गृह मंत्रालय ने चीन के औद्योगिक-वाणिज्यिक बैंक (आईसीबीसी) की दूसरी शाखा खोलने के प्रस्ताव पर अपनी आपत्ति जता दी है. सूत्रों के हवाले से द इंडियन एक्सप्रेस ने यह ख़बर दी है.

ख़बर के मुताबिक आईसीबीसी कुल संपत्तियों के मामले में दुनिया का सबसे बड़ा बैंक है. इसकी एक शाखा मुंबई में पहले ही संचालित हो रही है. उसने पिछले साल नई दिल्ली में अपनी दूसरी शाखा खोलने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के पास अर्ज़ी लगाई थी. इस पर वित्त मंत्रालय ने गृह मंत्रालय से राय मांगी. और सूत्र बताते हैं कि गृह मंत्रालय ने इस प्रस्ताव पर अपनी असहमति जताई है. इसका कारण यह बताया गया है कि आईसीबीसी में चीन के 11-12 नागरिक काम कर रहे हैं. यह नियमों का खुला उल्लंघन है क्योंकि बैंक को सिर्फ़ चीन के सिर्फ तीन-चार नागरिकों को ही काम पर रखने की अनुमति है.

यही नहीं सूत्र बताते हैं कि विदेशी नागरिकों के लिए स्थापित क्षेत्रीय पंजीकरण कार्यालय (एफआरआरओ) में भी आईसीबीसी में कार्यरत चीन के सिर्फ तीन-चार नागरिक ही पंजीकृत हैं. बाकी सभी बिना पंजीकरण के ही अनधिकृत रूप से बैंक में काम करते रहे. इसके बाद पंजीकरण की प्रक्रिया से बचने के लिए छह महीने की निर्धारित समयावधि पूरी होने से पहले ही अपने देश वापस लौट गए. इसी तथ्य के मद्देनज़र गृह मंत्रालय का मानना है कि संभव है आईसीबीसी के ये अतिरिक्त कर्मचारी किन्हीं अवांछित गतिविधियों में भी शामिल रहे हों. इसी आधार पर मंत्रालय ने आईसीबीसी को दूसरी शाखा की अनुमति नहीं दी.

अलबत्ता बीओसी के प्रस्ताव पर गृह मंत्रालय ने कोई आपत्ति नहीं जताई है. सिर्फ़ बीओसी ही नहीं दक्षिण कोरिया के चार, नीदरलैंड्स के दो, ईरान के तीन और चेक गणराज्य, श्री लंका तथा मलेशिया के एक-एक बैंकों ने भी भारत में शाखाएं खोलने के लिए लाइसेंस मांगा है. बताया जाता है कि आरबीआई जल्द ही इस बाबत कोई घोषणा कर सकता है.