उत्तर प्रदेश के कुख्यात अपराधी प्रेम प्रकाश सिंह उर्फ मुन्ना बजरंगी की बागपत जिला जेल में गोली मारकर हत्या कर दी गई है. खबरों के मुताबिक बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के पूर्व विधायक लोकेश दीक्षित से रंगदारी मांगने के आरोप में सोमवार को बागपत की एक अदालत में उसकी पेशी होनी थी. लेकिन इससे पहले ही उसकी हत्या कर दी गई. इस हत्या के पीछे सुनील राठी गिरोह का हाथ बताया जा रहा है.

उधर, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जेल के भीतर किसी की हत्या होने को अत्यंत गंभीर मामला बताया है. उनका कहना है कि इस मामले की न्यायिक जांच के आदेश दे दिए गए हैं और दोषियों को किसी हाल में बख्शा नहीं जाएगा. उन्होंने आगे कहा कि बागपत जिला जेल के जेलर उदय प्रताप सिंह के अलावा इसके डिप्टी जेलर, वार्डन और हेड वार्डन को तुरंत प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है. बताया गया है कि इस हत्या की जांच के लिए गठित एक दल मौके पर पहुंच गया है.

इससे पहले बीते दिनों मुन्ना बजरंगी की पत्नी सीमा सिंह ने अपने पति पर जानलेवा हमले व हत्या का अंदेशा जताते हुए प्रदेश के मुख्यमंत्री से उसकी सुरक्षा बढ़ाने की मांग की थी. सीमा सिंह का कहना था कि उत्तर प्रदेश पुलिस किसी फर्जी मुठभेड़ में मुन्ना बजरंगी को निशाना बना सकती है. सीमा सिंह के इस शक का एक आधार यह भी था कि बीते दिनों उसके भाई और मुन्ना बजरंगी के साले पुष्पजीत सिंह की एक गैंगवार में हत्या कर दी गई थी.

कौन है मुन्ना बजरंगी?

मुन्ना बजरंगी का जन्म 1967 उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले में हुआ था. पांचवीं कक्षा के बाद ही उसने पढ़ाई से किनारा कर लिया था. उसकी किशोरावस्था में ही उत्तर प्रदेश पुलिस ने उसके खिलाफ अवैध हथियार रखने व मारपीट करने के लिए पहला मामला दर्ज किया था. इसके बाद अस्सी के दशक में उसे स्थानीय दबंग गजराज सिंह का संरक्षण मिला. 1984 में मुन्ना बजरंगी ने पहली हत्या की और इसके बाद गजराज सिंह के कहने पर उसने जौनपुर के भाजपा नेता रामचंद्र सिंह को अपना शिकार बनाया. साल 2005 में मुन्ना बजरंगी ने अपने कुछ साथियों के साथ भाजपा विधायक कृष्णानंद राय समेत छह अन्य लोगों को दिन-दहाड़े गोलियों से भून डाला था. सात लाख रुपये के इनामी बदमाश मुन्ना बजरंगी की तलाश उत्तर प्रदेश पुलिस के अलावा एसटीएफ और सीबीआई को भी थी. उसे अक्टूबर 2009 में मुंबई के मलाड इलाके से गिरफ्तार किया गया था.