सुप्रीम कोर्ट ने निर्भया सामूहिक बलात्कार मामले में सजा के खिलाफ दोषियों की पुनर्विचार याचिका खारिज कर दी है. इस मामले में मौत की सजा पाने वाले चार दोषियों में से तीन ने शीर्ष अदालत में पुनर्विचार याचिका दायर की थी. दोषियों के वकील की दलील थी कि 115 देशों ने मौत की सजा को खत्म कर दिया है और सभ्य समाज में इसका कोई स्थान नहीं होना चाहिए. उनका यह भी कहना था कि सजा-ए-मौत सिर्फ अपराधी को खत्म करती है, अपराध को नहीं. बीती चार मई को सुप्रीम कोर्ट ने इस पर फैसला सुरक्षित रख लिया था.

16 दिसंबर, 2012 को चलती बस में पैरा मेडिकल की पढ़ाई कर रही एक 23 साल की एक छात्रा के साथ छह लोगों ने सामूहिक बलात्कार किया था. घटना के 13 दिनों बाद सिंगापुर के एक अस्पताल में उसकी मौत हो गई थी. इस घटना ने देश भर में आक्रोश का माहौल पैदा किया था. दिल्ली सहित तमाम शहरों में इसे लेकर प्रदर्शन हुए थे.

इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने निचली अदालत द्वारा सुनाई गई फांसी की सजा को बरकरार रखा था. घटना के आरोपितों में से एक ने तिहाड़ जेल में खुदकुशी कर ली थी. उधर, एक नाबालिग आरोपित को तीन साल सुधार गृह में रखे जाने के बाद रिहा कर दिया गया था. सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद अब इन दोषियों के पास क्यूरेटिव पिटिशन और फिर राष्ट्रपति के पास दया याचिका का विकल्प ही बचता है