टाटा संस के पूर्व चेयरमैन सायरस मिस्त्री को झटका लगा है. नेशनल कंपनी लॉ ट्राइब्यूनल (एनसीएलटी) ने उनकी याचिका को खारिज कर दिया है. यह याचिका साइरस मिस्त्री ने उनको टाटा संस के चेयरमैन पद से हटाने के आदेश को चुनौती देते हुए दाखिल की थी. एनसीएलटी ने कहा कि उनकी दलीलों में दम नहीं है.

साइरस मिस्त्री 2012 में टाटा संस के चेयरमैन बने थे. अक्टूबर 2016 में उन्हें हटा दिया गया था और इसके बाद रतन डाटा अंतरिम तौर पर मुखिया बन गए थे. इसके दो महीने के बाद उनकी कंपनी साइरस इन्वेस्टमेंट ने एनसीएलटी का रुख किया था. साइरस मिस्त्री ने कहा था कि उनका निष्कासन अवैध था. उनका यह भी आरोप था कि टाटा संस कुप्रबंधन का शिकार है और इसमें छोटे शेयरधारकों का उत्पीड़न हो रहा है. लेकिन एनसीएलटी ने उनकी यह दलील नहीं मानी. उसकी मुंबई पीठ ने अपने फैसले में कहा कि साइरस मिस्त्री को इसलिए हटाया गया क्योंकि टाटा संस के निदेशक मंडल और उसके अधिकतर सदस्यों का उन पर से भरोसा उठ गया था.

ताजा फैसले को रतन टाटा के लिए राहत माना जा रहा है. उधर, साइरस मिस्त्री ने इस पर निराशा जताई है. इसके खिलाफ वे राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण के पास अपील कर सकते हैं.