बीते कुछ सालों से बनारस फैशन में है. हिंदी के नए लेखक बनारस के बैकग्राउंड वाली कहानियां लिखकर लोकप्रिय हो रहे हैं, फिल्मकार फिल्में बना रहे हैं और जो ऐसा कुछ नहीं कर पा रहे, वे बनारस घूमकर वहां की तस्वीरें सोशल मीडिया पर अपलोड कर संतुष्ट हो रहे हैं. यह बात बुरी लगने वाली है कि बनारस की इस लोकप्रियता का श्रेय वहां के सांसद और देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को नहीं जाता, लेकिन बनारस सहित तमाम मुल्क में जो माहौल है, उसकी जिम्मेवारी जरूर उनकी है! फिलहाल ‘मुल्क’ का ट्रेलर देखते हुए आपको इसी माहौल की फिक्र होती है और इस बात की भी कि कहीं यह एक प्रोपेगैंडा फिल्म तो नहीं है. यह लाइन लिखने के तुरंत बाद हमें एक डिस्क्लेमर देने की जरूरत महसूस होती है जिसमें लिखा होना चाहिए – यहां सरकार के अतिरिक्त समर्थन के साथ-साथ अतिरिक्त विरोध में बनाई गई फिल्मों को भी प्रोपेगैंडा फिल्म माना जाता है. और इस जरूरत का महसूस होना ही फिलहाल मुल्क की असल समस्या है.

‘मुल्क’ के ट्रेलर की बात करें तो यह बनारस के एक मुसलमान परिवार की कहानी दिखाता है. इस परिवार के एक सदस्य पर शहर में हुए आतंकी हमले में शामिल है. मुल्क की झलकियां दिखाती हैं कि इस परिवार को अपने ‘आतंकी’ बेटे की करनी का क्या नतीजा भुगतना पड़ता है. एक सामान्य और निर्दोष नागरिक होने के बावजूद, मुसलमान होने के कारण किसी व्यक्ति को क्या-क्या झेलना पड़ सकता है, यही ‘मुल्क’ दिखाने वाली है और यही इसकी यूएसपी होने जा रही है. हालांकि यह इस बात पर भी निर्भर करेगा कि फिल्मकार इसके भावनात्मक हिस्से पर ज्यादा जोर देने वाला है या राजनीतिक हिस्से पर. राजनीतिक पक्ष को चुनने पर फिल्म सही तरह से संतुलन साध पाएगी, यह बात ट्रेलर देखकर बहुत मजबूती से नहीं कही जा सकती.

ऋषि कपूर, नीना गुप्ता, आशुतोष राणा, तापसी पन्नू और रजत कपूर जैसे कलाकार इस फिल्म का हिस्सा हैं और यह लंबी-चौड़ी स्टार कास्ट अभिनय के मोर्चे पर ‘मुल्क’ के वजनदार होने का भरोसा दिलाती है. ऋषि कपूर अपनी देशभक्ति साबित करने को मजबूर मुसलमान बनकर थोड़े से लाउड नजर आने के बावजूद प्रभावित करते हैं. उनके अलावा अति-लाउड वकील बने आशुतोष राणा एक-दो झलकियों में ही, उन्हें देखने की उत्सुकता जगा देते हैं. तापसी पन्नू ट्रेलर में कुछ खास तो नहीं करतीं फिर भी पहले का काम देखते हुए उनसे भी यहां बेहतर काम की उम्मीद की जा सकती है.

सत्य घटनाओं पर आधारित बताई जा रही इस फिल्म का लेखन और निर्देशन अनुभव सिन्हा ने किया है. ‘तुम बिन,’ ‘दस’ और ‘रा-वन’ जैसी फिल्मों के लिए पहचाने जाने वाले सिन्हा की इस फिल्म के संवाद सोशल मीडिया पर दिए जाने वाले तर्कों और बहसों से प्रेरित लगते हैं. बेशक, ऐसा संवादों को वास्तविकता का टच देने के लिए किया गया होगा, लेकिन बतौर दर्शक हम फिल्म में इससे कुछ आगे दिखाए जाने की उम्मीद जरूर करेंगे. दूसरे शब्दों में कहें तो किसी भारतीय मुसलमान की यह सच्ची कहानी, कच्ची न निकली तो खूब अच्छी लगने वाली है. हालांकि यह कितनी अच्छी होगी, इसका पता तीन अगस्त को फिल्म रिलीज के साथ ही चलेगी.

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