सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को स्पष्ट निर्देश दिया कि ताज महल में स्थित मस्जिद में ‘बाहरी लोगों को नमाज़ पढ़ने की इजाज़त नहीं दी जा सकती.’ शीर्ष अदालत ने इस संबंध में आगरा जिला प्रशासन की ओर से बीती 24 जनवरी को जारी आदेश को क़ायम रखा.

द टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट ने सिर्फ स्थानीय लोगों को नमाज़ की इजाज़त देते हुए यह भी कहा कि दुनिया के सात अजूबों में शुमार इस ऐतिहासिक-पुरातात्विक महत्व की इमारत का संरक्षण सबसे अहम है. ख़बर के अनुसार शीर्ष अदालत में यह मामला जिला प्रशासन के जनवरी के आदेश के ख़िलाफ़ दायर एक अपील के जरिए पहुंचा था. जिला प्रशासन ने अपने आदेश में सिर्फ उन्हीं को ताज महल परिसर की मस्जिद में शुक्रवार की नमाज़ की इजाज़त दी थी जो स्थानीय रहवासी हैं.

जिला प्रशासन ने यह भी बंदोबस्त किया था कि शुक्रवार की नमाज़ में शामिल होने के लिए लोगों को इस बात के वैध पहचान पत्र दिखाने होंगे कि वे आगरा के ही रहने वाले हैं. ऐसा न करने पर उन्हें ताज परिसर में घुसने नहीं दिया जाएगा. यहां यह भी बताते चलें कि ताज महल शुक्रवार को पर्यटकों के लिए बंद रहता है. ग़ौरतलब यह भी है कि जिला प्रशासन ने इन शिकायतों के मद्देनज़र यह आदेश जारी किया था कि ताज महल में तमाम ग़ैर-भारतीय (बांग्लादेशी भी) शुक्रवार की नमाज़ में शामिल होते हैं.

ख़ास बात यह भी है कि इसी तरह का आदेश भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) 2013 में भी जारी किया था. लेकिन वह आदेश कभी प्रभावी तरीके से लागू नहीं हुआ. हालांकि अब सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद इसके प्रभावी होने की उम्मीद बन गई है.