ब्रिटेन के विदेश मंत्री बोरिस जॉन्सन ने सोमवार को इस्तीफ़ा दे दिया. बताया जाता है कि ब्रिटेन के यूरोपियन यूनियन (ईयू) छोड़ने के मसले पर उनके प्रधानमंत्री थेरेसा मे के साथ मतभेद ज़्यादा बढ़ गए थे.

ख़बरों के मुताबिक थेरेमा मे चाहती हैं कि ईयू से हटने के बाद भी ब्रिटेन और ईयू के रिश्ते प्रभावित न हों. दोनों के नज़दीकी संबंध बने रहें. इसके लिए उन्होंने विशेष योजना भी तैयार की है. लेकिन बोरिस जॉन्सन इस योजना से सहमत नहीं हैं. सिर्फ जॉन्सन ही नहीं ब्रिटेन के ईयू छोड़ने (ब्रेक्ज़िट) के मसले देखने वाले मंत्री डेविड डेवस भी मे की योजना से असहमत हैं. वे भी अपने पद से इस्तीफ़ा दे चुके हैं. इन दो बड़े इस्तीफ़ों ने मे सरकार की ब्रेक्ज़िट नीति काे सवालों के घेरे में ला दिया है.

ब्रेक्ज़िट का मसला ब्रिटेन की विदेश और व्यापार दोनों ही नीतियों से जुड़ा है. यह एक ऐसी चुनौती है जो बीते 50 साल में संभवत: पहली बार ब्रिटेन के सामने पेश आई है. ब्रिटेन में दो साल पहले जनमत संग्रह हुआ था. इसमें ब्रिटेन के बहुमत ने ब्रेक्ज़िट का समर्थन किया था. हालांकि उस वक्त के ब्रिटिश प्रधानमंत्री डेविड कैमरन ब्रिटेन के ईयू में बने रहने के पक्ष में थे. लेकिन जब जनमत का फैसला उल्टा आया तो उन्होंने इस्तीफ़ा दे दिया था. इसके बाद ब्रेक्ज़िट का फैसला लागू करने की ज़िम्मेदारी थेरेसा मे के कंधों पर है जो ईयू के साथ कारोबारी संबंध बनाए रखते हुए उसका साथ छोड़ना चाहती हैं.