सुप्रीम कोर्ट ने निर्भया सामूहिक बलात्कार मामले में दोषियों की फांसी की सजा बरकरार रखी है. इस खबर को आज के अधिकतर अखबारों ने पहले पन्ने पर जगह दी है. इस मामले में मौत की सजा पाने वाले चार दोषियों में से तीन ने शीर्ष अदालत में पुनर्विचार याचिका दायर की थी. बीती चार मई को सुप्रीम कोर्ट ने इस पर फैसला सुरक्षित रख लिया था. इस फैसले के बाद अब इन दोषियों के पास क्यूरेटिव पिटिशन (फैसले की समीक्षा याचिका) और फिर राष्ट्रपति के पास दया याचिका का विकल्प ही बचता है.

उधर, सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा कि दिल्ली में जिन निजी अस्पतालों ने सरकार से सब्सिडी यानी रियायती दर पर जमीन ली है उन्हें गरीब मरीजों का इलाज मुफ्त में करना होगा. यह खबर भी अखबारों की प्रमुख सुर्खियों में शामिल है. शीर्ष अदालत के मुताबिक ओपीडी में आने वाले 25 और आईपीडी के 10 फीसदी गरीब मरीजों को मुफ्त इलाज मिलना चाहिए. अदालत ने साफ किया है कि जो निजी अस्पताल इस आदेश का विरोध करने की कोशिश करेंगे उनकी लीज रद्द की जा सकती है.

टीवी पर सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई की सीधे प्रसारण की तैयारी

संसद की कार्यवाही की तरह सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई का भी जल्द ही टीवी पर सीधा प्रसारण हो सकता है. दैनिक भास्कर की खास खबर के मुताबिक इस बारे में शीर्ष अदालत में एक याचिका दायर की गई थी. बीती तीन मई को केंद्र सरकार से इस पर सुझाव मांगे गए थे. इसके बाद केंद्र ने भी इस पर अपनी सहमति दे दी. बताया जाता है कि सरकार इसके लिए एक अलग चैनल लाने की तैयारी में है. वहीं, मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पीठ ने सभी पक्षकारों से इस बारे में दिशा-निर्देश तैयार करने को कहा है. इस मामले की अगली सुनवाई 23 जुलाई को होनी है. फिलहाल दुनिया के कुछ देशों में ही अदालती कार्यवाही के लाइव टेलिकास्ट की इजाजत है. अमेरिका और ब्रिटेन में इस पर सख्त पाबंदी है.

महाराष्ट्र : पांच महीने के दौरान 16 जिलों में 995 नवजातों की मौत

महाराष्ट्र के 16 जिलों में सितंबर, 2017 से लेकर जनवरी, 2018 के बीच 995 नवजातों की मौत हुई है. द टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक इसकी जानकारी महिला और बाल विकास मंत्री पंकजा मुंडे ने सोमवार को विधानसभा में दी. उन्होंने इस बात से इनकार किया कि इसकी वजह केवल गर्भवती महिलाओं का कुपोषित होना है. पंकजा मुंडे का मानना है कि तय समय से पहले बच्चे का जन्म, नवजातों का वजन कम होना और बीमारियां भी इसका कारण हैं. उन्होंने बताया कि बीते साल इन 16 जिलों में 2161 बच्चों की मौत जन्म लेने के छह महीने के भीतर ही हो गई थी.

सेवा संबंधी मामले को लेकर केजरीवाल सरकार की सुप्रीम कोर्ट पहुंचने की तैयारी

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद भी दिल्ली की आम आदमी पार्टी (आप) सरकार और उप-राज्यपाल (एलजी) के बीच सेवा संबंधी मामले को लेकर टकराव सुलझता नहीं दिख रहा है. हिन्दुस्तान में छपी खबर के मुताबिक केजरीवाल सरकार एक बार फिर शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाने की तैयारी में है. बताया जाता है कि इस बार दिल्ली सरकार अपनी याचिका में सेवा समेत अन्य सभी लंबित याचिकाओं के जल्द निपटारे की मांग कोर्ट के सामने रखेगी. बताया जाता है कि सरकार सुप्रीम कोर्ट के फैसले के आधार पर सेवा विभाग पर अपना हक जता रही है. वहीं, एलजी इसे अदालत में लंबित होने की बात कहकर सरकार को देने से इनकार कर रहे हैं.

सीटों को लेकर कोई स्पष्टता ही नहीं है, तो क्या कहा जा सकता है? : नीतीश कुमार

जनता दल-यूनाइटेड (जदयू) प्रमुख नीतीश कुमार ने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) में किसी तरह के विवाद को खारिज किया है. बिजनेस स्टैंडर्ड में प्रकाशित खबर के मुताबिक उन्होंने लोक सभा चुनाव में सीट बंटवारे को लेकर भी किसी तरह की जल्दबाजी से इनकार किया है. उन्होंने पटना में कहा, ‘हमारे बीच कोई विवाद नहीं है. भाजपा के साथ मिलकर हम लोग सरकार चला रहे हैं और इसमें कोई समस्या नहीं है. हम अपराध, भ्रष्टाचार और संप्रादायिकता के साथ कोई समझौता नहीं करेंगे. जो बातें सुनने को मिली हैं, सब हवा-हवाई हैं. राजग में कोई बड़ा भाई-छोटा भाई नहीं है.’ इसके आगे नीतीश कुमार ने कहा, ‘सीटों को लेकर कोई स्पष्टता ही नहीं है, तो क्या कहा जा सकता है? जब बात होगी, तो सबके सामने आएगी.’ बताया जाता है कि 12 जुलाई को भाजपा अध्यक्ष अमित शाह और नीतीश कुमार के बीच बैठक तय है. इसमें सीटों को लेकर चर्चा हो सकती है.