यह ख़बर सोमवार शाम से बड़ी तेजी से सामने आई है कि केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने दूरसंचार क्षेत्र की दो बड़ी कंपनियों वोडाफोन और आइडिया के विलय को मंज़ूरी दे दी है. हालांकि इसके साथ सूत्रों के हवाले कुछ ख़बरें ऐसी भी आई हैं जिनमें बताया गया है कि अभी अंतिम तौर पर देश में दूरसंचार क्षेत्र के इस सबसे बड़े सौदे को मंज़ूरी नहीं दी गई है. बल्कि सूत्रों की मानें तो दूरसंचार विभाग ने वोडाफोन पर कुछ शर्तें लगाई हैं उन्हें पूरा करने पर ही सौदे को मंज़ूरी दी जाएगी.

लाइव मिंट के अनुसार दूरसंचार विभाग ने सौदे की अंतिम मंज़ूरी से पहले वोडाफोन से 7,200 करोड़ रुपए मांगे हैं. इनमें 3,900 करोड़ रुपए नगद और 3,300 करोड़ रुपए बैंक गारंटी के तौर पर जमा कराने को कहा गया है. यह पैसे एक बार में जमा किए जाने वाले स्पेक्ट्रम शुल्क के रूप में लिए जा रहे हैं. सूत्रों के मुताबिक 4.4 मेगाहर्ट्ज़ तक की एयरवेव्ज़ वोडाफोन से आइडिया सेलुलर के नाम ट्रांसफर करने के एवज़ में नगद शुल्क लिया जा रहा है. इसके अलावा 4.4 मेगाहर्टज़ से ऊपर की एयरवेव्ज़ के लिए बैंक गारंटी मांगी गई है.

सूत्र बताते हैं कि इसके अलावा दूरसंचार विभाग के पास अभी वोडाफोन इंडिया की जो बैंक गारंटी है उसे भी आइडिया सेलुलर को अपनी बैंक गारंटी से बदलना (रिप्लेसमेंट) होगा. वोडाफोन इंडिया को लिखित वादा भी करना होगा कि अदालत में विचाराधीन पिछले बकाये (टैक्स आदि) से संबंधित मामलों में अगर उसके ख़िलाफ़ फैसला आया तो वह निर्धारित पूरी रकम चुकाएगी. दूरसंचार विभाग के एक अधिकारी नाम न छापने की शर्त पर बताते हैं कि वोडाफोन-आइडिया जब इन शर्तों को पूरा कर देंगे उनके विलय को मंज़ूरी मिल जाएगी.

इस बाबत द इकॉनॉमिक टाइम्स में छपी ख़बर की मानें तो वोडाफोन-आइडिया के विलय की सशर्त मंज़ूरी प्रधानमंत्री कार्यालय के सीधे दख़ल के बाद ही मिल सकी है. बताया जाता है कि बीते कुछ सालों में दूरसंचार क्षेत्र में देश का यह सबसे बड़ा सौदा होगा. इसके बाद जो कंपनी बनेगी वह देश की सबसे बड़ी दूरसंचार कंपनी होगी. फिलहाल क़रीब 15 साल से देश में भारती-एयरटेल देश की नंबर-एक दूरसंचार कंपनी बनी हुई है. अभी आइडिया दूरसंचार क्षेत्र में नंबर-दो तथा वोडाफोन तीसरे नंबर पर काबिज़ हैं.