केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने देश के ‘श्रेष्ठ शिक्षण संस्थानों’ की सूची जारी की है. इसमें आईआईटी (भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान) दिल्ली और बॉम्बे शामिल हैं. आईआईएससी (भारतीय विज्ञान संस्थान) बेंगलुरु, बिट्स पिलानी और मणिपाल यूनिवर्सिटी जैसे संस्थान भी हैं. साथ में उद्याेगपति मुकेश अंबानी की जियो यूनिवर्सिटी भी, जो अब तक अस्तित्व में ही नहीं आई है.

ख़बरों के मुताबिक केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने यह सूची जारी की है. इसमें देश के छह श्रेष्ठ शिक्षण संस्थानों को जगह दी गई है. इनमें तीन सार्वजनिक क्षेत्र के हैं और इतने ही निजी क्षेत्र से. इन्हें ‘प्रतिष्ठित संस्थान’ का दर्ज़ा दिया जाएगा ताकि इन्हें विश्वस्तरीय संस्थानों के रूप में विकसित करने के लिए मदद दी जा सके. लेकिन इस सूची में शामिल मुकेश अंबानी की जियो यूनिवर्सिटी को शामिल किए जाने पर विवाद पैदा हो गया है क्योंकि यह संस्थान अब तक कागजों में ही है.

सोशल मीडिया पर सरकार के इस फैसले की जमकर खिंचाई हो रही है कि उसने मौज़ूदा कई बड़े संस्थानों को छोड़कर जियो यूनिवर्सिटी को प्राथमिकता दी जिसका पता गूगल पर भी नहीं मिल रहा है. हालांकि इस किरकिरी के बावज़ूद मानव संसाधन विकास मंत्रालय के सचिव आर सुब्रमण्यम इस फैसले का बचाव करते हैं. उनके मुताबिक, ‘अभी हमने इन ‘श्रेष्ठ संस्थानों’ को सिर्फ ‘लैटर ऑफ इंटेंट’ (सरकार की मंशा जताने वाला पत्र) जारी किया है. उन्हें अभी कोई दर्ज़ा नहीं दिया गया है.’

उन्होंने बताया, ‘जियो यूनिवर्सिटी को ग्रीनफील्ड श्रेणी में इसके लिए चुना गया है. दूसरी बात- इस योजना के तहत निजी संस्थानों को सरकार से कोई वित्तीय मदद देने का प्रावधान नहीं है. इसके बज़ाय उन्हें नियम-क़ायदों के झंझट से जहां तक संभव है बचाते हुए पूरी स्वायत्ता दी जाएगी. इस पर भी एक बात ये है कि इन सभी संस्थानों को अभी अपनी कार्ययोजना पेश करनी है कि वे कैसे इस सुविधा के बाद ख़ुद को विश्वस्तरीय संस्थान के तौर पर परिवर्तित करेंगे. इसके बाद उन्हें यह सुविधा मिलेगी.’