रोजगार सृजन को लेकर आलोचना का सामना कर रही नरेंद्र मोदी सरकार अब आंकड़े जुटाने में लगी हुई है. द एशियन एज के मुताबिक मोदी सरकार चाहती है कि उसके चार साल के कार्यकाल में जितनी भी नौकरियां पैदा हुईं उनकी सही संख्या अगले महीने स्वतंत्रता दिवस से पहले उपलब्ध हो जाए. सूत्रों का कहना है कि प्रधानमंत्री कार्यालय के हस्तक्षेप के बाद सूचना व प्रसारण मंत्रालय ने सभी मंत्रालयों और विभागों को एक औपचारिक संदेश भेजा है. इसमें उनसे कहा गया है कि वे अपने आंकड़ों का पता लगाएं.

अगले लोकसभा चुनाव में अब एक साल से भी कम समय बचा है. ऐसे में इस कवायद को मोदी सरकार के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है. इसके तहत जो आंकड़े उपलब्ध होंगे उन्हें लेकर सरकार और भाजपा जनता के बीच जाएगी. लोकसभा चुनाव से पहले तीन राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं. कहा जा रहा है कि उनमें भी इन आंकड़ों का इस्तेमाल किया जाएगा. सूत्रों के मुताबिक इससे भाजपा लोगों को यह बता पाएगी कि मोदी सरकार की नीतियों से अर्थव्यवस्था पर सकारात्मक प्रभाव पड़ा है.

सरकार को उम्मीद है कि आंकड़े पेश कर वह जनता को यह बताने में कामयाब रहेगी कि उसकी जनहित योजनाओं (मुद्रा योजना, स्टैंड अप इंडिया, कौशल विकास, स्टार्ट अप इंडिया और मेक इन इंडिया) ने देश पर दूरगामी प्रभाव छोड़ा है. हाल में नीति आयोग समेत केंद्र सरकार के अन्य विभागों ने रोजगार सृजन से संबंधित आंकड़े उपलब्ध कराए थे. लेकिन विपक्ष ने सरकार की आलोचना करते हुए आंकड़ों को खारिज कर दिया था. रोजगार के मामले में नेशनल सैंपल सर्वे ऑफिस द्वारा भी एक सर्वेक्षण किया जा रहा है, लेकिन इसके आंकड़े अगले साल तक उपलब्ध हो पाएंगे. यही वजह है कि सरकार ने नए प्रयास के तहत मंत्रालयों को आंकड़े जुटाने को कहा है.