पाकिस्तान में इसी महीने की 25 तारीख को आम चुनाव होना है. दिलचस्प बात यह है कि इस बार के आम चुनाव में यहां के प्रमुख राजनीतिक दल ‘कश्मीर समस्या’ के नाम पर वोट बटोरने की कोशिश करते नहीं दिख रहे. यही नहीं मुख्य राजनीतिक दलों ने कश्मीर के बजाय आर्थिक विकास और रोजगार जैसे मुद्दों को प्राथमिकता दी है.

द इकनॉमिक टाइम्स के मुताबिक इस बात का इशारा पाकिस्तान मुस्लिम लीग- नवाज (पीएमएल- एन), पाकिस्तान पीपल्स पार्टी (पीपीपी) और पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के चुनावी घोषणा पत्र से भी मिलता है. इन तीनों ही दलों ने अपने घोषणा पत्रों में कश्मीर को अपनी प्राथमिकताओं में शामिल नहीं किया है.

नवाज शरीफ की पीएमएल-एन ने अपने चुनावी एजेंडे में देशहित के लिए चीन के साथ आपसी सहयोग को और मजबूत करने के अलावा रूस के साथ निकटता को प्राथमिकता दी है. इसके अलावा पार्टी ने परमाणु हथियारों की सुरक्षा के अलावा देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए आतंकवाद और आतंकवादी संगठनों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करने की बात भी कही है. कश्मीर का मुद्दा इस पार्टी के एजेंडे के दस प्रमुख बिंदुओं में से नौंवें स्थान पर है.

उधर पीटीआई की प्राथमिकताओं में देश की आर्थिक विकास दर और सकल घरेलू उत्पाद में वृद्धि के अलावा रोजगार के मौके बढ़ाए जाने को प्राथमिकता दी गई है. इमरान खान के नेतृत्व वाली इस पार्टी की चार प्राथमिकताओं में कश्मीर का मुद्दा तीसरे स्थान पर है. पड़ोसी मुल्क की यह पार्टी राष्ट्र संघ सुरक्षा परिषद् के प्रस्तावों के जरिये कश्मीर समस्या का समाधान निकालने की वकालत भी करती है.

उधर, पीपीपी की तरफ से चुनावी मैदान में किस्मत आजमा रहे बिलावल भुट्टो कश्मीर समस्या का समाधान इस्लामाबाद और नई दिल्ली के बीच शांतिपूर्ण तरीके से आपसी बातचीत के जरिये निकालने का इरादा रखते हैं. कुल मिलाकर पाकिस्तान की तीनों प्रमुख पार्टियां कश्मीर में स्थायी शांति बहाली की इच्छा रखती हैं, लेकिन उनकी प्राथमिकताओं में अब अपने देश का कल्याण और आर्थिक विकास सबसे ऊपर हो गया है.