मद्रास हाईकोर्ट ने एक अहम फैसला सुनाया है. उसने केंद्रीय माध्यमिक परीक्षा बोर्ड (सीबीएसई) को इस साल नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट (नीट) देने वाले उन परीक्षार्थियों को 196 अतिरिक्त अंक देने का आदेश दिया है जिन्होंने यह परीक्षा तमिल भाषा में दी थी. अदालत ने सीबीएसई से कहा है कि यह काम करने के बाद वह बदली हुई रैंक लिस्ट जारी करे. इसके लिए उसे दो हफ्ते का वक्त दिया गया है.

इस मामले में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के सांसद टीके रंगराजन ने याचिका दायर की थी. उनका कहना था कि प्रश्नपत्र में 49 प्रश्न ऐसे थे जिनका तमिल में गलत अनुवाद किया गया था. परीक्षार्थियों ने भी मांग की थी कि इस गलती के लिए उन्हें क्षतिपूर्ति अंक यानी कंपनसेटरी मार्क्स दिए जाएं. अदालत के फैसले से 24,000 छात्रों को फायदा होगा. यह फायदा उन छात्रों को भी मिलेगा जिन्होंने इन सवालों का जवाब नहीं दिया.

मेडिकल कॉलेजों में स्नातक पाठ्यक्रम में प्रवेश के लिए छह मई को लगभग 13.3 लाख छात्रों ने देश के 136 शहरों में स्थित 2,255 परीक्षा केंद्रों में नीट की परीक्षा दी थी. इसके नतीजे जून में आए थे. इसके बाद काउंसलिंग प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है.