भाजपा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी एक और महत्वपूर्ण मुद्दे पर अपने बयान को लेकर चर्चा में हैं. इस बार उनके निशाने पर समलैंगिक हैं. सुब्रमण्यम स्वामी ने कहा है कि समलैंगिकता हिंदुत्व की विचाराधारा के खिलाफ है और इसका इलाज होना चाहिए. न्यूज एजेंसी एएनआई के मुताबिक स्वामी ने कहा कि इस बात पर मेडिकल रिसर्च होनी चाहिए कि समलैंगिकता का इलाज हो सकता है या नहीं.

सुब्रमण्यम स्वामी का यह बयान ऐसे समय में आया है जब इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक पीठ अहम सुनवाई कर रही है. टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक स्वामी ने कहा है, ‘यह (समलैंगिकता) कोई सामान्य बात नहीं है. हम इसका जश्न नहीं मना सकते. यह हिंदुत्व के खिलाफ है. हमें मेडिकल रिसर्च में निवेश कर पता लगाना चाहिए कि इसका इलाज हो सकता है या नहीं.’ स्वामी ने यह भी कहा कि समलैंगिकता को अपराध घोषित करने वाली आईपीसी की धारा 377 पर सुनवाई के लिए संवैधानिक पीठ गठित करने के बजाय सरकार को सात या नौ न्यायाधीशों की पीठ पर विचार करना चाहिए.

समलैंगिकता के मुद्दे पर सुब्रमण्यम स्वामी पहले भी विवादित बयान देते रहे हैं. इसी साल जनवरी में उन्होंने कहा था कि धारा 377 बनी रहनी चाहिए ताकि समलैंगिकता का घमंड दिखाने वालों को सजा मिल सके. उससे पहले 2015 में उन्होंने समलैंगिकता को ‘अनुवांशिक दोष’ बताया था.

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई शुरू

सोमवार से सुप्रीम कोर्ट ने इस अहम मुद्दे पर सुनवाई शुरू कर दी. इस दौरान उसने धारा 377 को लेकर दायर की गईं याचिकाओं पर कोई प्रतिक्रिया नहीं देने पर केंद्र सरकार को फटकार भी लगाई. कोर्ट ने कहा कि वह इस मुद्दे पर सरकार को और समय नहीं देगा. सर्वोच्च अदालत ने कहा कि यह मामला काफी समय से लंबित है और केंद्र सरकार को अब तक अपना जवाब दाखिल कर देना चाहिए था.