भारत ने मंगलवार को एक बार फिर कश्मीर की स्थिति पर संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार आयुक्त की रिपोर्ट को खारिज किया है. समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक संयुक्त राष्ट्र में भारत के उप स्थाई प्रतिनिधि तन्मय लाल ने कहा है कि यह रिपोर्ट संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के सदस्यों द्वारा विचार करने के योग्य नहीं थी. इस दौरान तन्मय लाल का कहना था कि जम्मू-कश्मीर पर यह ‘तथाकथित’ रिपोर्ट ‘एक अधिकारी के स्पष्ट पूर्वाग्रह को दर्शाती है और इसमें शामिल जानकारी असत्यापित स्रोतों से हासिल की गई थी.’ भारतीय प्रतिनिधि ने यह भी कहा है कि इस अधिकारी को यह रिपोर्ट तैयार करने के लिए अधिकृत नहीं किया गया था.

14 जून को संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार आयुक्त जेड राड अल हुसैन ने कश्मीर की स्थिति पर अपनी एक रिपोर्ट जारी की थी. इसमें नियंत्रण रेखा के दोनों ओर मानवाधिकार उल्लंघन होने की बात कही गई थी. तब विदेश मंत्रालय ने इसे झूठ बताते हुए खारिज कर दिया था. इसके अलावा 19 जून को भारत ने संयुक्त राष्ट्र (यूएन) से यह कहते हुए रिपोर्ट खारिज करने का अनुरोध किया था कि यह संयुक्त राष्ट्र द्वारा आतंकवाद को लेकर बनी सहमति को कमजोर करती है और संगठन द्वारा घोषित आतंकवादी गुटों को सशस्त्र समूह बताकर आतंकवाद को वैधता देती है.

भारत की तरफ से तन्मय लाल की ताजा प्रतिक्रिया यूएन में पाकिस्तान की स्थाई प्रतिनिधि मलीहा लोधी के एक बयान के जवाब में आई है. मलीहा लोधी ने सोमवार को ‘बच्चे और सशस्त्र संघर्ष’ विषय पर सुरक्षा परिषद में बहस के दौरान इस रिपोर्ट का जिक्र किया था.