उत्तर प्रदेश के वाराणसी में काशी विश्वनाथ कॉरिडोर और गंगा पाथ-वे परियोजना से जुड़ी एक जनहित याचिका इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मंगलवार को खारिज कर दी है. इस याचिका पर फैसला सुनाते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस डीबी भोसले और जस्टिस यशवंत वर्मा ने कहा कि इन परियोजनाओं से काशी के मूल स्वरूप में बदलाव नहीं होगा बल्कि इनके बनने से जनसुविधाएं बढ़ेंगी, शहर के सौंदर्य में इजाफा होगा.

इंडिया टुडे के मुताबिक सुनील कुमार सिंह की तरफ से जनहित याचिका लगाई गई थी. इसमें काशी विश्वनाथ कॉरिडोर का ब्ल्यू प्रिंट जारी करने के साथ करीब 1500 मकानों को न ढहाए जाने की मांग थी. इसके अलावा काशी के पारंपरिक स्वरूप को पूर्ववत बनाए रखने जैसी कुछ और मांगें भी थीं. इससे पहले कमला देवी नाम की एक महिला ने भी इन परियोजनाओं के विरोध में याचिका दाखिल की थी. लेकिन अदालत ने सभी याचिकाओं को खारिज कर दिया.

खबरों के मुताबिक साल 2017 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वाराणसी के प्राचीन काशी विश्वनाथ मंदिर का विस्तार गुजरात के सोमनाथ मंदिर की तर्ज पर किए जाने की इच्छा जताई थी. इसके बाद केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार ने काशी विश्वनाथ कॉरिडोर परियोजना का खाका तैयार किया. इसके तहत काशी विश्वनाथ मंदिर तक जाने वाली गलियों को 40 फुट तक चौड़ा किया जाना है. साथ ही मंदिर से ललिता घाट तक गंगा पाथ-वे बनाया जाना है. इसी के लिए सरकार ने कई म​कानों और मंदिरों के अधिग्रहण का काम शुरू किया है. लेकिन स्थानीय लोगों के अलावा संतों का एक वर्ग इन परियोजनाओं के खिलाफ है.