पाकिस्तानी सेना ने मंगलवार को अपनी तरफ से स्पष्ट किया कि देश में चल रही आम चुनाव की प्रक्रिया में उसकी कोई सीधी दख़लंदाज़ी नहीं है. समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक सेना के प्रवक्ता मेजर जनरल आसिफ ग़फूर ने कहा है, ‘सेना सीधे तौर चुनाव प्रक्रिया में शामिल नहीं हैं. हम सिर्फ पाकिस्तान चुनाव आयोग (ईसीपी) की मदद कर रहे हैं. वह भी ग़ैर-राजनीतिक और निष्पक्ष तरीके से.’

मेजर जनरल ग़फूर ने कहा, ‘निष्पक्ष, पारदर्शी और साफ-सुथरे चुनाव सुनिश्चित करने के लिए आयोग जो भी मदद चाहेगा, वह सेना करेगी.’ इसके साथ ही सेना की ओर से यह भी बताया कि चुनाव प्रक्रिया के दौरान पूरे देश में 3,71,000 जवानों को मतदान केंद्रों पर तैनात किया जाएगा. ख़बरों के मुताबिक 2013 के आम चुनाव के वक्त हुई जवानों की तैनाती के मुकाबले यह संख्या पांच गुना ज़्यादा है. यहीं बता दें कि पाकिस्तान की नेशनल असेंबली और पांच राज्यों के असेंबलियों के लिए 25 जुलाई को मतदान है.

पाकिस्तान की आज़ादी के बाद 70 साल के इतिहास में यह लगातार दूसरा मौका है जब लोकतांत्रिक प्रक्रिया से चुनी हुई सरकारों ने पांच साल का अपना कार्यकाल पूरा किया है. साथ ही यह सिलसिला आगे बढ़ते हुए तीसरे चुनाव तक पहुंचा है. इससे पहले 2008 तक कोई भी सरकार अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर पाई. ज़्यादातर समय सत्ता की बागडोर सेना के हाथ में रही. इसीलिए इस बार भी आरोप लग रहे हैं कि सेना चुनाव प्रक्रिया को अपने हिसाब से प्रभावित करने की कोशिश कर रही है.