लगातार एक हफ्ते तक छात्रों के विरोध प्रदर्शन के बाद जादवपुर विश्वविद्यालय प्रशासन ने मंगलवार को छह अंडरग्रेजुएट कोर्सों के लिए प्रवेश परीक्षा बहाल करने का फैसला किया है. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक मंगलवार शाम को विश्वविद्यालय की कार्यकारी परिषद की आपात बैठक बुलाई गई थी, जिसके बाद प्रशासन ने यह निर्णय लिया है. प्रशासन ने फैसला किया है कि परीक्षा में पहले की तरह बारहवीं के और प्रवेश परीक्षा में प्राप्त अंकों को 50-50 फीसदी तवज्जो दी जाएगी. हालांकि अभी छात्रों की ओर से हड़ताल खत्म करने को लेकर घोषणा नहीं की गई है.

उधर, जादवपुर विश्वविद्यालय के कुलपति सुरंजन दास ने कार्यकारी परिषद के फैसले का विरोध किया है. द टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक उन्होंने कहा, ‘विश्वविद्यालय का संचालन इस तरह से संभव नहीं है. मैं कुलाधिपति से बात करूंगा और उनसे आग्रह करूंगा कि वे मुझे और प्रो वीसी को हमारी जिम्मेदारी से मुक्त कर दें.’

कला संकाय (आर्ट फैकल्टी) के लगभग 20 छात्र छह जुलाई से विश्वविद्यालय के उस फैसले के बाद भूख हड़ताल पर बैठ गए थे, जिसमें छह कोर्सों में बारहवीं के अंकों के आधार पर एडमिशन देने की बात कही गई थी. ये कोर्स हैं अंग्रेजी, तुलनात्मक साहित्य, बंगाली, इतिहास, राजनीति विज्ञान और दर्शनशास्त्र. भूख हड़ताल के दौरान दो छात्रों की तबीयत भी बिगड़ गई थी जिन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है.

उधर, कलकत्ता उच्च न्यायालय के समक्ष भूख हड़ताल पर बैठे छात्रों के खिलाफ एक याचिका भी दायर की गई है. याचिकाकर्ता राम प्रसाद सरकार ने दावा किया है कि आंदोलन की वजह से विश्वविद्यालय में शैक्षणिक गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं.