सुप्रीम कोर्ट ने अनुसूचित जाति और जनजाति (एसटी/एससी) के कर्मचारियों के लिए पदोन्नति में आरक्षण से संबंधित 2006 के अपने आदेश के खिलाफ अंतरिम आदेश पारित करने से इनकार कर दिया है. बुधवार को शीर्ष अदालत ने कहा कि इस मसले पर सात जजों की संवैधानिक पीठ बनाए जाने की जरूरत है जो पुराने फैसले की समीक्षा करेगी. इस पर अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने कहा कि मामले की तत्काल सुनवाई होनी चाहिए क्योंकि इस मुद्दे पर अदालतों के अलग-अलग फैसलों की वजह से भ्रम की स्थिति बन गई है और इसके चलते रेलवे सहित तमाम विभागों में लाखों नियुक्तियां अटकी पड़ी हैं.

2006 में आए एक फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि सरकार के लिए यह जरूरी नहीं है कि वह पदोन्नति में एससी/एसटी के लिए आरक्षण का प्रावधान करे. अदालत ने कहा था कि अगर सरकार ऐसा करना ही चाहती है तो उसे सार्वजनिक रोजगार में इस वर्ग के पिछड़ेपन और उसके पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं होने की बात को साबित करने के लिए उचित आंकड़े जुटाने होंगे.

हालांकि बीती पांच जून को शीर्ष अदालत ने केंद्र सरकार को एसटी-एससी समुदाय के कर्मचारियों को पदोन्नति में आरक्षण प्रदान करने का आदेश दिया था. यह आदेश तब तक प्रभावी रहेगा जब तक अदालत इस मामले पर आखिरी फैसला नहीं सुनाती. यह आदेश केंद्र सरकार की उन दलीलों के बाद आया था जिनमें कहा गया था कि हाई कोर्टों के अलग-अलग फैसलों और खुद सुप्रीम कोर्ट द्वारा 2015 में इस मामले पर यथास्थिति बनाए रखने के आदेश के चलते पदोन्नति की समूची प्रक्रिया ही रुकी पड़ी है.