फीफा विश्व कप 2018 के दूसरे सेमीफाइनल में क्रोएशिया ने इंग्लैंड को 2-1 से हरा दिया है. क्रोएशिया पहली बार विश्व कप के फाइनल में पहुंचा है. वहीं, सेमीफाइनल मुकाबले में हार के साथ फुटबॉल के जन्मदाता इंग्लैंड का विश्व कप ट्राफी घर ले जाने का 52 साल पुराना सपना फिर टूट गया. इंग्लैंड अब तक सिर्फ एक विश्व कप 1966 जीता है. अब अगर 15 जुलाई को होने वाले फाइनल में क्रोएशिया फ्रांस को हरा देता है तो वह फीफा विश्व कप जीतने वाली पूर्वी यूरोप की पहली टीम हो जाएगा.

बुधवार को देर रात खेले गए दूसरे सेमीफाइनल में शुरुआत के दस मिनट में इंग्लैंड ने जोरदार खेल दिखाया. खेल के पांचवें मिनट में ही क्रोएशिया के स्टार मिडफील्डर लुका मोद्रिच के फाउल पर इंग्लैंड को स्कोरिंग रेंज से फ्री किक मिली. ट्रिपियर ने दनदनाती फ्री किक लगाकर अद्भुत गोल दागा और इंग्लैंड के दिग्गज खिलाड़ी डेविड बेकहम की याद दिला दी. पिछले 12 सालों में किसी भी इंग्लिश खिलाड़ी का फ्री किक पर यह पहला गोल था.

पहले हाफ के खेल में इंग्लैंड के खिलाड़ियों ने कई मौके बनाए लेकिन वे गेंद गोल में नहीं डाल सके. इंग्लैंड के स्टार स्ट्राइकर हैरी केन दो ऐसे मौके चूके जो आसानी से गोल में तब्दील किए जा सकते थे. हालांकि एक बार वे आफ साइड करार दे दिए गए. लेकिन एक बार तो गोल लाइन के करीब ही गेंद गोलकीपर से छिटक गई, लेकिन हैरी केन गोल नहीं मार सके.

पहले हाफ में इंग्लैंड को बढ़त मिली और मोटे तौर पर कहा जा सकता है कि उसने खेल में दबदबा बनाए रखा. हालांकि करीब 30 मिनट के खेल के बाद क्रोएशिया के बेहतरीन मिडफील्ड ने तालमेल के साथ खेलना शुरु किया और टीम खेल में लौटने लगी. लेकिन क्रोएशिया के मिडफील्डर मोद्रिच को इंग्लिश मिडफील्ड और डिफेंस ने जगह नहींं दी और उन्हें पीछे हटकर खेलना पड़ा. क्रोएशिया ने कुछ मौके बनाए और कुछ लांग रेंजर लिए, लेकिन गोलपोस्ट और शॉट्स में काफी फासला रहा. पहला हाफ इंग्लैंड की 1-0 की बढ़त के साथ खत्म हुआ.

दूसरे हाफ की शुरुआत से ही खेल आक्रामक रहा और कुछ एेसे टैकल हुए कि दोनों टीमों के खिलाड़ियों को पीले कार्ड मिले. दोनों टीमें अटैक और काउंटर अटैक कर रही थीं,लेकिन मिडफील्ड में क्रोएशिया के दबदबे ने इंग्लैंड के खेल को दबा दिया. हालांकि खेल के 56 वें मिनट में हैरी केन को फिर गोल करने का मौका मिला. उन्होंने हेडर लगाया लेकिन गेंद को ठीक से कनेक्ट नहीं कर सके. गोल भले नहीं आ रहे थे, लेकिन क्रोएशिया का दबदबा दूसरे हाफ में दिखने लगा था. अब उनके स्टार खिलाड़ी मोद्रिच आगे बढ़कर खेल रहे थे और प्ले मेकर की भूमिका निभा रहे थे.

क्रोएशिया का यह खेल 68 वें मिनट में कामयाब हुआ जब पेरेसिच ने शानदार गोल कर क्रोएशिया को 1-1 से बराबरी दिला दी. इंग्लैंड के कोच साउथगेट ने बदलाव में आक्रामक खिलाड़ियों को मैदान में भेजा, लेकिन पहले से ही दबी दिख रही इंग्लैंड की टीम के कंधे गोल खाने के बाद और झुक गए. हालांकि रशफोर्ड के आने के बाद कुछ देर के लिए खेल की गति बढ़ी, लेकिन क्रोएशिया की रक्षा पंक्ति मुस्तैद रही. वीडा क्रोएशिया की डिफेंस लाइन में खासी मेहनत करते दिखे. 90वें मिनट में इंग्लैंड को फ्री किक मिली लेकिन, यह बेकार चली गई.

दूूूसरे हाफ का खेल खत्म होने पर दोनों टीमों का स्कोर 1-1 रहा और खेल अतिरिक्त समय में चला गया. ऐसा लगा कि यह मैच भी पेनाल्टी शूट आउट तक जाएगा और क्रोएशिया अपने लगातार तीसरे मैच में पेनाल्टी शूट अाउट खेलेगी. लेकिन खेल के 109 वें मिनट में क्रोएशिया के मैंडजोकिच ने बेहतरीन गोल दाग क्रोएशिया की ओर से फाइनल के दरवाजे पर दस्तक दे दी. इंग्लैंड ने कुछ कोशिशें कीं लेकिन, उसे सफलता नहीं मिली.

मैच खत्म होने की सीटी बजी और इसके साथ ही क्रोएशिया पूर्वी यूरोप की वह पहली टीम बन गई जो विश्व कप के फाइनल में पहुुंची और मौजूदा समय में दुनिया के नक्शे पर है. इससे पहले सिर्फ चेकोस्लोवाकिया की टीम विश्व कप के फाइनल में पहुंची थी और दो बार वह विश्व कप की उप विजेता रही. लेकिन 1992 में विघटन के बाद चेकोस्लोवाकिया नाम का कोई देश नहीं रह गया.