बीते हफ्ते पाकिस्तान के नेशनल अकाउंटबिलिटी ब्यूरो (नैब) की एक विशेष अदालत ने पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ और उनकी बेटी मरियम शरीफ को भ्रष्टाचार का दोषी पाते हुए 10 और सात साल की सजा सुना दी. नवाज शरीफ पर लंदन में स्थित एवनफील्ड में अवैध तरीके से चार फ्लैट खरीदने का आरोप था जिसे अदालत ने सही पाया. करीब एक महीने से लंदन में अपनी पत्नी का इलाज करा रहे नवाज शरीफ ने गिरफ्तारी के आदेश के बाद भी पाकिस्तान लौटने का निर्णय लिया. शुक्रवार रात लाहौर हवाई अड्डे पर उतरते ही उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया.

पाकिस्तान में आम चुनाव इसी महीने की 25 जुलाई को होने वाले हैं. इनमें अब तक नवाज शरीफ की स्थिति बेहद कमजोर नजर आ रही थी. वे खुद चुनाव नहीं लड़ सकते. उनकी बेटी, दामाद और बेटों को भी अदालत ने चुनाव में हिस्सा लेने से प्रतिबंधित कर दिया है. शरीफ परिवार पर चल रहे भ्रष्टाचार के मामलों की वजह से उनकी पार्टी पीएमएल-एन को भी भारी नुकसान हुआ है. कई बड़े नेता पार्टी छोड़कर चले गए हैं. इस बार का चुनाव पार्टी उनके छोटे भाई और पंजाब प्रांत के मुख्यमंत्री शहबाज शरीफ के नेतृत्व में चुनाव लड़ रही है. पर शहबाज के साथ दिक्क्त यह है कि उनका पंजाब के बाहर कोई खास जनाधार नजर नहीं आता.

लेकिन, विशेष अदालत का फैसला आने के बाद पाकिस्तान में चुनावी परस्थितियां बदलती नजर आ रही हैं. पाकिस्तान के लगभग सभी जानकारों का मानना है कि पहले अदालत के फैसले और उसके बाद नवाज शरीफ के लंदन से पाकिस्तान लौट कर जेल जाने के निर्णय ने चुनावी समीकरणों को काफी हद तक पलट दिया है.

फैसले में झोल

अगर विशेष अदालत के फैसले पर नजर डालें तो इसमें कई झोल नजर आते हैं. अदालत ने अपने फैसले में कहा है कि नेशनल अकाउंटबिलिटी ब्यूरो यह साबित नहीं कर पाया कि नवाज शरीफ ने भ्रष्टाचार और मनी लॉन्डरिंग के जरिये लंदन में फ़्लैट खरीदे थे. लेकिन, नवाज शरीफ अपने निर्दोष होने का कोई पुख्ता सबूत नहीं दे सके हैं इसलिए अदालत ने यह मान लिया कि ये फ्लैट उन्होंने काले धन से ही खरीदे थे. इससे भी ज्यादा चौंकाने वाली बात यह है कि अदालत ने मरियम शरीफ को केवल यह मानकर सजा सुना दी कि उन्होंने सच्चाई को छिपाने और जाली दस्तावेज बनवाने में अपने पिता की मदद की थी.

पाकिस्तान के चर्चित वकील अली अहमद कुर्द और सलमान अकरम रजा सहित लगभग सभी कानूनी जानकार अदालत के इस फैसले को कानूनन दोषपूर्ण बताते हैं. उनका कहना है कि संदेह के आधार पर अदालत द्वारा इतना बड़ा फैसला सुनाया जाना सही नहीं है. कइयों के मुताबिक ऐसा पहली बार देखने में आया है कि कोर्ट ने जांच एजेंसी के सबूत न दे पाने के बाद भी आरोपित को सजा सुना दी.

पाकिस्तान में अदालत के फैसले को लेकर कई और बातें भी कही जा रही हैं. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अदालत के फैसले पर जज के दो जगह हस्ताक्षर हैं और दोनों ही जगह ये अलग-अलग तरह से किए गए हैं. साथ इस फैसले में कई जगह स्पेलिंग की गलतियां भी देखने को मिली हैं. इसे लेकर कहा जा रहा है कि अदालत से यह फैसला जल्दबाजी में दिलवाया गया जिससे मरियम शरीफ को चुनाव लड़ने से रोका जा सके. खबरें तो ये भी हैं कि यह फैसला पाकिस्तानी सेना की ओर से लिखकर दिया गया था जिसे जज ने अदालत में पढ़ दिया.

पाकिस्तान की राजनीति पर नजर रखने वाले जानकारों का मानना है कि चुनाव से कुछ रोज पहले जनता के बीच इस तरह की बातें सामने आने से चीजें नवाज शरीफ के हक़ में जाएंगी और इससे उनकी पार्टी को ही फायदा होगा.

भावनात्मक लाभ

पाकिस्तान के जाने-माने पत्रकार खालिद महमूद एक न्यूज़ चैनल से बातचीत में कहते हैं, ‘अभी तक इस चुनाव में इमरान खान का पलड़ा भारी नजर आ रहा था. लेकिन नवाज शरीफ के पाकिस्तान आने के बाद परिस्थितियां तेजी से बदलेंगी.’ खालिद कहते हैं अदालत के विवादित फैसले के बाद नवाज शरीफ द्वारा जेल जाने का फैसला करना ‘मौके पर चौका’ मारने जैसा है.

दरअसल, नवाज शरीफ जानते हैं कि अदालत के इस फैसले के बाद भी अगर वे जेल जाते हैं तो निश्चित ही उन्हें जनता का भावनात्मक सपोर्ट मिलेगा. पाकिस्तान का इतिहास देखें तो जनता ने भावनाओं में बहकर कई बार मतदान किया है. जुल्फिकार अली भुट्टो की फांसी और फिर 2008 में बेनजीर भुट्टो को गोली मारे जाने के बाद जनता ने बिना लीडर वाली पार्टी को भी सत्ता में पहुंचा दिया था.

पार्टी ने मौके को भुनाने की तैयारियां शुरू कीं

पाकिस्तानी जानकारों की मानें तो शहबाज शरीफ और पार्टी के अन्य बड़े नेता अच्छे से जानते हैं कि उनकी पार्टी को केवल नवाज शरीफ के नाम पर ही वोट मिल सकते हैं. पाकिस्तान में शहरी आबादी और नौजवान भले इमरान खान के साथ हैं. लेकिन, ग्रामीण इलाके और 40 की उम्र से ऊपर की अधिकांश आबादी आज भी नवाज शरीफ को अपना नेता मानती है. यही वजह है कि पार्टी ने उनके जेल जाने को चुनाव में भुनाने की पूरी तैयारी कर ली है. बताया जाता है कि पार्टी की पूरी कोशिश है कि किसी तरह नवाज शरीफ के पाकिस्तान आने को ऐतिहासिक क्षण बना दिया जाए. पंजाब में पीएमएलएन के सभी उम्मीदवारों से बड़ी संख्या में लाहौर एयरपोर्ट के बाहर भीड़ जुटाने को कहा गया.

पाकिस्तानी मीडिया की मानें तो पार्टी की रणनीति जनता के बीच यह संदेश भेजने की है कि नवाज शरीफ ने बड़ी कुर्बानी दी है, वे अपने साथ भेदभाव किए जाने और पत्नी की हालत नाजुक होने के बाद भी देश और अवाम के लिए वापस लौटे हैं. पार्टी के कुछ नेता मीडिया को यह भी बताते हैं कि अगर नवाज शरीफ और मरियम शरीफ को लंदन से पाकिस्तान आने में एक हफ्ते का समय लगा है तो इसके पीछे भी एक वजह है. उनके मुताबिक लंदन में शरीफ और उनकी बेटी के भावनात्मक भाषणों की वीडियो रिकॉर्डिंग्स तैयार की गई हैं जिन्हें तब चुनावी रैलियों में चलाया जा रहा होगा जब नवाज शरीफ और उनकी बेटी जेल में होंगे.