आध्यात्मिक गुरु दादा जेपी वासवानी का 99 साल की उम्र में निधन हो गया है. आज सुबह पुणे स्थित एक अस्पताल में उन्होंने अंतिम सांस ली. उनके एक सहयोगी ने बताया कि तीन हफ्ते पहले वृद्धावस्था संबंधी समस्याओं के चलते उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था. उन्होंने बताया, ‘कुछ दिनों से उनकी (दादा वासवानी) हालत बिगड़ रही थी और आज सुबह उनका निधन हो गया.

दादा वासवानी का जन्म दो अगस्त, 1918 को पाकिस्तान के सिंध प्रांत वाले हैदराबाद में हुआ था. उन्होंने अपना जीवन शाकाहार को बढ़ावा देने और पशु अधिकारों के लिए काम करने में लगाया. उनके नेतृत्व में ‘साधु वासवानी मिशन’ (एसवीएम) आज दुनिया भर में स्कूल और कॉलेज चलाता है. इसके तहत हर साल 25 नवंबर मांसाहार रहित दिवस के रूप में मनाया जाता है.

दादा वासवानी को 1965 में साधु टीएल वासवानी के निधन के बाद एसवीएम का प्रमुख बनाया गया था. उन्होंने ‘मोमेंट ऑफ काम’ नाम से विश्व शांति आंदोलन की शुरुआत की थी. दादा वासवानी को प्यार से दादा कह कर बुलाया जाता था. हर साल उनका जन्मदिन विश्व क्षमा दिवस के रूप में मनाया जाता है. उन्होंने ब्रिटेन की संसद और शिकागो स्थित विश्व धर्म संसद जैसे कई मंचों पर भाषण दिए थे. दादा वासवानी ने 150 से ज्यादा किताबें भी लिखीं. उनके अंतिम दर्शन के लिए उनका पार्थिव शरीर पुणे के साधु वासवानी मिशन में रखा गया है.