​दिल्ली में बन रहे ‘कूड़े के पहाड़ों’ को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने राज्य के उप राज्यपाल अनिल बैजल को फटकार लगाई है. कोर्ट ने उप राज्यपाल की आलोचना करते हुए कहा है कि उनके (राज्यपाल) के पास इस गंदगी को साफ कराने संबंधी शक्तियां हैं पर वे इस पर गंभीरता के साथ अमल नहीं कर रहे. इसके साथ ही कोर्ट ने यह भी साफ किया कि इस काम के लिए दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता.

न्यूज 18 के मुताबिक दिल्ली में कचरा प्रबंधन को लेकर गुरुवार को हुई सुनवाई में उप राज्यपाल की तरफ से सुप्रीम कोर्ट के समक्ष एक शपथपत्र प्रस्तुत किया गया था. इसमें दिल्ली के कचरा निस्तारण व प्रबंधन के लिए दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) को जिम्मेदार बताया गया था. साथ ही उप राज्यपाल ने कचरा निस्तारण व इसके प्रबंधन को लेकर कई बैठकें करने की बात भी इस शपथपत्र में कही थी.

इस पर तल्ख टिप्पणी करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आप (उप राज्यपाल) चाहे कूड़ा प्रबंधन के मामले पर बैठकें कीजिए या फिर इन बैठकों में पचासों कप चाय पीजिए. कोर्ट सिर्फ यह जानना चाहता है कि दिल्ली में बने ‘कूड़े के पहाड़’ कब तक हटेंगे. इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने उप राज्यपाल से कूड़े के इन पहाड़ों को हटाने को लेकर टाइमलाइन और स्टेटस रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए भी कहा है.

इससे पहले इसी मामले पर मंगलवार को सुनवाई के दौरान जस्टिस मदन बी लोकुर और जस्टिस दीपक गुप्ता की पीठ ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा था कि कूड़े के बोझ के नीचे दिल्ली दबी जा रही है और मुंबई पानी में डूब रही है. लेकिन इन मामलों पर सरकार सक्रियता नहीं दिखा रही. दो जजों की पीठ ने यह भी कहा था कि इन मामलों पर शीर्ष अदालत हस्तक्षेप करती है तो न्यायपालिका पर दूसरे मामलोंं में दखल देने की बातें शुरू कर दी जाती हैं.