सेना देश में अपनी सभी छावनियां ख़त्म करने पर गंभीरता से विचार कर रही है. सूत्रों के हवाले से इस तरह की ख़बर आई है. इसके मुताबिक सेना ने रक्षा मंत्रालय को इस आशय का प्रस्ताव भी भेज दिया है.

द टाइम्स ऑफ इंडिया की ख़बर की मानें तो सेना के शीर्ष नेतृत्व ने रक्षा मंत्रालय को जो प्रस्ताव दिया है उसके मुताबिक सेना की देश में मौज़ूद सभी छावनियों को ख़त्म कर उनमें स्थित सैन्य क्षेत्र को पूरी तरह सेना के हवाले (एक्सक्लूज़िव मिलिट्री स्टेशन के तौर पर) किया जा सकता है. जबकि नागरिक क्षेत्र को संबंधी नगरीय निकाय को सौंपा जा सकता है. ताकि उस क्षेत्र में मूलभूत रखरखाव की ज़िम्मेदारी वही उठाए. सूत्रों की मानें तो सैन्य नेतृत्व को लगता है कि इससे रक्षा बजट पर अनावश्यक बोझ कम हो सकता है.

सूत्र बताते हैं कि देश में पहली सैन्य छावनी लगभग 250 साल पहले स्थापित की गई थी. इसके बाद इनकी संख्या अब तक 62 से ज़्यादा हो चुकी है. इनके रखरखाव पर सेना को हर साल लगभग 476 करोड़ रुपए ख़र्च करने पड़ते हैं. जबकि इन छावनियों के बड़े हिस्से का इस्तेमाल नागरिक (सिविल) क्षेत्र के तौर पर होता है. सूत्र बताते हैं कि सेना अध्यक्ष जनरल बिपिन रावत ने इस पूरे मामले का अध्ययन करने का आदेश दे दिया है. उन्होंने अध्ययन रिपोर्ट सितंबर महीने के शुरू में पेश करने का आदेश भी दिया है.

वैसे सेना प्रमुख अनावश्यक ख़र्चे कम करने के लिए इसके अलावा भी कई कदम उठा रहे हैं. मसलन- द एशियन एज़ की ख़बर के मुताबिक उनके निर्देशों के बाद इस बार चीन जाने वाले भारतीय सेना के प्रतिनिधिमंडल का आकार छोटा कर दिया गया है. अब इस प्रतिनिधिमंडल में सिर्फ तीन सदस्य ही जाएंगे. पहले आठ से 10 सदस्य जाते थे. चार दिन के चीन दौरे पर इस प्रतिनिधिमंडल की अगुवाई सेना की पूर्वी कमान के कमांडर करेंगे. यह दल 13 अगस्त को भारत से रवाना होगा और 18 को वापस लौट आएगा.