उत्तराखंड हाई कोर्ट ने अपने एक अहम फैसले में कहा है कि ऊंची जाति का कोई भी पुजारी निचली जातियों के धार्मिक अनुष्ठानों में पूजा करने से इनकार नहीं कर सकता. गुरुवार को दिए इस फैसले में हाई कोर्ट के जज राजीव शर्मा और लोक पाल सिंह की डिविजन बेंच ने कहा, ‘उत्तराखंड में ऊंची जाति के पुजारी सभी धार्मिक स्थानों और मंदिरों में निचली जातियों के अनुष्ठानों, पूजा या धार्मिक संस्कारों में पूजा करने से इनकार नहीं करेंगे.’

बेंच ने यह भी कहा कि राज्य के सभी लोगों को अपनी जाति की परवाह किए बिना किसी भी मंदिर में जाने की अनुमति है. अदालत का यह भी कहना था कि योग्य और पूर्ण रूप से प्रशिक्षित किसी भी व्यक्ति को जाति देखे बिना पुजारी बनाया जा सकता है. उसके मुताबिक सुप्रीम कोर्ट द्वारा पूर्व में दिए गए फैसले और संविधान में इस प्रकार की भावना निहित है.

हाई कोर्ट ने 2016 में दायर की गई एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए यह फैसला दिया है. इसे अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति से संबंध रखने वाले राजस्थान के कुछ याचिकाकर्ताओं ने दायर किया था.