जम्मू-कश्मीर में गठबंधन सरकार टूटने के बाद भाजपा और पीडीपी में तनातनी जारी है. राज्य की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने भाजपा की अगुवाई वाली केंद्र सरकार को चेताते हुए कहा है कि अगर वह पीडीपी को तोड़ने की कोशिश करती है तो इसके परिणाम खतरनाक होंगे. उन्होंने यह भी कहा है कि अगर भाजपा लोगों के मतदान अधिकार को खारिज करने की कोशिश करेगी तो हालात 1987 जैसे हो सकते हैं. महबूबा मुफ्ती के मुताबिक तब घाटी में सलाहुद्दीन और यासीन मलिक जैसे अलगाववादियों का उदय हुआ था और इस बार हालात पहले से ज्यादा खराब हो सकते हैं.

इसके पहले भाजपा ने 19 जून को पीडीपी के साथ अपने तीन साल पुराने गठबंधन को तोड़ने का फैसला किया था जिसके बाद सरकार गिर गई थी. अगले कुछ हफ्तों के दौरान पीडीपी के कई नेताओं ने पार्टी नेतृत्व के खिलाफ वंशवाद का आरोप लगाते हुए बयानबाजी भी की. वर्तमान में राज्य में राज्यपाल शासन लागू है.

उधर, महबूबा मुफ्ती के बयान पर जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री और नेशनल कांफ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्ला की प्रतिक्रिया भी आई है. एक ट्वीट में उन्होंने कहा कहा, ‘पीडीपी के टूटने से कोई नया आतंकी नहीं बनेगा. लोग उस पार्टी के अंत पर शोक नहीं मनाएंगे जो दिल्ली में बनी थी और जिसका मकसद कश्मीरियों के वोट बांटना था.’