आयकर विभाग ने स्वराज इंडिया पार्टी के प्रमुख और आम आदमी पार्टी (आप) के पूर्व संस्थापक नेता योगेंद्र यादव के परिवार के ठिकानों से लगभग 27 लाख रुपए नगद ज़ब्त किए हैं. विभाग ने कुछ अन्य दस्तावेज़ भी अपने कब्ज़े में लिए हैं. आयकर विभाग के सूत्रों के हवाले से द इकॉनॉमिक टाइम्स में छपी ख़बर से यह ख़ुलासा हुआ है.

आयकर विभाग ने छापामारी के दौरान 15 करोड़ रुपए के लेन-देन के कागज़ भी ज़ब्त किए गए हैं. एक वरिष्ठ आयकर अधिकारी के अनुसार इस लेन-देन को संदिग्ध माना गया है. आयकर विभाग ने बुधवार की सुबह योगेंद्र यादव की बहन के रेवाड़ी स्थित अस्पताल और उनसे जुड़े कुछ अन्य स्थानों पर छापा मारा था. छापे की कार्रवाई की अगले दिन भी चलती रही. हालांकि अब बताया जाता है कि यह पूरी हो गई है. इस बाबत एक आयकर अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि छापे के दौरान यह भी पता चला है कि यादव की बहन और उनसे जुड़े लोगों ने चंडीगढ़ में 93 लाख रुपए की काली कमाई से एक प्लॉट भी ख़रीदा था.

हालांकि इस पूरी कार्रवाई को यादव ने बदले की राजनीति बताया है. उन्होंने बुधवार की रात को ही इस बाबत ट्वीट किया था. इसमें उन्होंने आरोप लगाया था कि केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार उनके परिवार को निशाना बना रही है. उनके मुताबिक उन्होंने किसानों को फसलों का उचित मूल्य दिलाने के लिए जो आंदोलन शुरू किया उसका दमन करने के लिए मोदी सरकार ऐसे क़दम उठा रही है. इस मामले में योगेंद्र यादव को उनके पूर्व सहयोगी, आप संयोजक और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल का भी समर्थन मिला है. केजरीवाल ने कहा, ‘हम इस कार्रवाई की सख़्त शब्दों में करते हैं. मोदी सरकार को बदले की ऐसी राजनीति रोकनी चाहिए.’