भ्रष्टाचार के आरोपों में दोषी करार दिए गए पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ आज शाम अपनी बेटी मरियम के साथ लंदन से स्वदेश लौट रहे हैं. उन्हें 10 साल क़ैद की सज़ा हुई है जबकि मरियम शरीफ को सात साल क़ैद की सज़ा सुनाई गई है. इन दोनों के बारे में आ रही ख़बरों की मानें तो उन्हें पाकिस्तान पहुंचते ही हवाई अड्‌डे पर ही ग़िरफ़्तार किया जा सकता है. ख़बरों के मुताबिक उन्हें रावलपिंडी के पास अडियाला जेल में रखा जा सकता है.

इस बीच पाकिस्तानी मीडिया नियामक ने नवाज़ और मरियम से जुड़ी बयानबाज़ी के प्रसारण पर रोक लगा दी है. ख़ास तौर पर न्यूज़ चैनलों पर. यह रोक इन तथ्यों के मद्देनज़र अहम है कि देश में आम चुनाव हो रहे हैं. नेशनल असेंबली और पांच राज्यों की असेंबलियों के लिए 25 जुलाई को मतदान है. और नवाज़ शरीफ के बारे में कहा जा रहा है कि वे अपनी ग़िरफ़्तारी को अपने और अपनी पार्टी के पक्ष में माहौल बनाने के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं.

तीन बार पाकिस्तान के प्रधानमंत्री रह चुके 68 नवाज़ शरीफ के बारे में माना जाता है कि वे विपरीत परिस्थितियों के बावज़ूद शानदार वापसी करने में माहिर हैं. इस बार उनकी पार्टी (पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज़) उनकी अगुवाई के बिना उनके भाई और पंजाब के मुख्यमंत्री रहे शाहबाज़ शरीफ के नेतृत्व में चुनाव मैदान में हैं. लेकिन चूंकि शाहबाज़ का जनाधार पंजाब के बाहर ज़्यादा नहीं है इसलिए पीएमएल-एन भी अब तक क्रिकेटर से नेता बने इमरान खान की पीटीआई (पाकिस्तान तहरीक़-ए-इंसाफ) से पिछड़ती दिख रही है.

संभवत: यही कारण है कि नवाज़ ने देश लौटकर अपनी ग़िरफ़्तारी देने का फैसला किया है. पाकिस्तान की राजनीति की समझ रखने वालों का भी मानना है कि नवाज़ की ग़िरफ़्तारी से चुनावी माहौल तेजी से उनकी पार्टी के पक्ष में जा सकता है. वे ख़ुद और उनकी पार्टी के नेता भी उनको ताक़तवर पाकिस्तानी सेना का मुकाबला करने वाले लड़ाके की तरह पेश कर सकते हैं. साथ ही वे अपनी और अपने परिवार के सदस्यों (बेटी, दामाद और पौत्र आदि) की ग़िरफ़्तारियों को पाकिस्तानी सेना की साज़िश बता सकते हैं.