नीति आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष अरविंद पनगढ़िया ने केंद्र सरकार द्वारा जियो इंस्टिट्यूट को उत्कृष्टता संस्थान का दर्जा देने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ की है. अरविंद पनगढ़िया ने कहा है, ‘वे भारत के गिनेचुने साहसी नेताओं में से हैं. भारत में जैसा माहौल है, मोदी की जगह कोई और प्रधानमंत्री होता तो जिस चीज का अभी अस्तित्व तक नहीं है, उसके बारे में घोषणा करने से पहले दो-तीन दफा सोचता.’ वाशिंगटन में अमेरिका-भारत रणनीतिक और साझेदारी शिखर सम्मेलन में शामिल हुए पनगढ़िया ने यहां सम्मेलन से इतर बातचीत के दौरान ये बातें कही हैं. इसके साथ ही उन्होंने कहा है, ‘यही वो काम है जिसे करने की जरूरत है क्योंकि कोई भी नया विश्वविद्यालय अपने नियम-कायदे अपने मुताबिक बिलकुल शुरू से बना सकता है. जबकि पुराने संस्थानों में बदलाव लाना काफी मुश्किल होता है.’
इसके पहले सोमवार को सरकार ने छह संस्थानों को ‘इंस्टिट्यूट ऑफ एमिनेंस’ का दर्जा दिया था, जिसमें तीन निजी और तीन सार्वजनिक शैक्षणिक संस्थान थे. इन निजी संस्थानों में जियो इंस्टिट्यूट भी शामिल था. इस दर्जे के बाद सार्वजनिक क्षेत्र के तीनों संस्थानों को अगले पांच साल तक 1000 करोड़ रुपये का अनुदान दिया जाएगा. इसके साथ ही निजी संस्थानों को अकादमिक और प्रशासनिक स्वायत्ता प्रदान की जाएगी.
केंद्र द्वारा इस सूची में रिलायंस समूह के जियो इंस्टिट्यूट को शामिल करने की इतिहासकार रामचंद्र गुहा, वकील प्रशांत भूषण और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय की प्रोफेसर आयशा किदवई सहित कई लोगों ने आलोचना की थी. इसके बाद सरकार और रिलायंस दोनों ने कई स्पष्टीकरण भी दिए हैं. सरकार ने स्पष्ट किया है कि जियो इंस्टिट्यूट को ये सुविधाएं तभी दी जाएंगी जब वह तीन साल के भीतर अपने वादों को पूरा करेगा.
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