मोहम्मद कैफ ने क्रिकेट के सभी प्रारूपों से संन्यास ले लिया है. उन्होंने इसकी घोषणा सोशल नेटवर्किंग साइट ट्विटर के जरिये की. ट्विटर पर भेजे गए एक भावुक संदेश में उन्होंने लिखा, ‘जब से मैंने क्रिकेट खेलना शुरू किया. मेरा सपना था कि मैं एक दिन अपने देश के लिए खेलूं. मैं सौभाग्यशाली रहा कि क्रिकेट के मैदान पर 190 दिनों तक मुझे देश का प्रतिनिधित्व करने का मौका मिला. मुझे इस बात का अफसोस रहेगा कि मैं इससे ज्यादा दिन देश के लिए नहीं खेल सका. अब क्रिकेट से विदाई का वक्त आ गया है और आज का दिन सबसे उपयुक्त है. मैं क्रिकेट के सभी प्रारूपों से सन्यास की घोषणा करता हूं.’

आज से ठीक 16 साल पहले 2002 में इंग्लैंड के खिलाफ लॉर्ड्स के मैदान पर खेलते हुए मोहम्मद कैफ ने भारत को नेटवेस्ट ट्रॉफी के फाइनल मुकाबले में ऐतिहासिक जीत दिलाई थी. उस मैच में भारत 325 रन के भारी-भरकम लक्ष्य का पीछा करने उतरा था. वीरेंद्र सहवाग, सौरभ गांगुली, सचिन तेंदुलकर और राहुल द्रविड़ के सस्ते में आउट हो जाने के बाद मोहम्मद कैफ ने युवराज सिंह के साथ मिलकर भारत की लड़खड़ाई पारी को संभाला था. इस मैच में उन्होंने 75 गेंदों पर अविजित 87 रन बनाए ​थे.

मोहम्मद कैफ साल 2003 के विश्व कप में आॅस्ट्रेलिया के खिलाफ फाइनल मुकाबला खेलने वाली टीम में भी शामिल रहे हैं. इसके अलावा अंडर 19 टीम की कप्तानी करते हुए इस ​वर्ग का विश्वकप हासिल करने की उपलब्धि भी उनके नाम पर है. भारत के लिए 125 एकदिवसीय मैचों में 32.01 की औसत से कुल 2753 रन बनाने वाले कैफ का सर्वोच्च व्यक्तिगत स्कोर 111 रन का रहा है. एकदिवसीय मुकाबलों में उनके नाम पर दो शतक और 17 अर्धशतक भी शामिल हैं.

भारत के लिए कैफ ने 13 टेस्ट मैच भी खेले हैं. इस प्रारूप की 22 पारियों में उनके नाम पर 32.84 की औसत से 624 रन दर्ज हैं. टेस्ट क्रिकेट में उन्होंने एक शतक और तीन अर्ध शतक भी लगाए और ऐसे मुकाबलों में उनका सर्वाधिक निजी स्कोर 148 रन का रहा है. भारतीय टीम के सर्वश्रेष्ठ क्षेत्ररक्षकों में शुमार किए जाने वाले मोहम्मद कैफ ने अपना आखिरी मुकाबला दक्षिण अफ्रीका के दौरे पर खेला था. घरेलू क्रिकेट में छत्तीसगढ़ का नेतृत्व करने के साथ मोहम्मद कैफ आंध्र प्रदेश की रणजी टीम का भी हिस्सा रह चुके हैं.