फुटबॉल विश्वकप के फाइनल में क्रोएशिया की टीम पहली बार पहुंची है. रविवार को उसका मुकाबला फ्रांस से होने वाला है. फ्रांस की टीम बीते 20 साल में तीसरी बार फाइनल में पहुंची है. वह 1998 में विश्वकप जीत भी चुकी है. उस समय उसने अपने से ज़्यादा ताक़तवर कही जाने वाली ब्राज़ील की टीम को 3-0 से हराया था. इस बार भी उसके हौसले बुलंद हैं. उसकी जीत की भविष्यवाणियां भी हो रही हैं. यानी क्रोएशिया के लिए यह एक मुश्किल मुकाबला साबित हो सकता है. सो ज़ाहिर तौर पर इस अहम मुकाबले में उसकी जीत के लिए क्रोएशियाई लोग तो दुआ करेंगे ही गोवा के एक कोने में भी इस टीम की जीत की दुआएं की जाएंगी क्योंकि यहां से क्रोएशिया का ख़ास रिश्ता है.

द टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक पुराने गोवा से महज़ तीन-चार किलोमीटर की दूरी पर एक जगह है गॉन्डलिम. महज़ 200 लोगों की आबादी होगी. यहां 16वीं सदी में कभी क्रोएशिया के कुछ नाविक और व्यापारी आए थे. भारत की धरती पर उन्होंने इस गांव में आसरा लिया. हालांकि बहुत ज़्यादा समय तो वे यहां नहीं ठहरे लेकिन जब तक रुके उसी दौरान वे 1541 में अपनी निशानी के तौर पर एक चर्च बनवा गए. सेंट ब्लैज़ के नाम पर इस चर्च का नामकरण हुआ. इसे साओ ब्रैज़ भी कहते हैं.

ख़बर के मुताबिक कंबर्जुआ नहर के किनारे बना यह चर्च आज भी गॉन्डलिम के लोगों को क्रोएशिया से भावनात्मक तौर पर जोड़ता है. सिर्फ स्थानीय लोग ही नहीं क्रोएशिया से आने वाले पर्यटक भी अपनी गोवा यात्रा के दौरान गॉन्डलिम आने से नहीं चूकते. बताया जाता है कि क्रोएशिया की इंडोलॉजिस्ट (भारतीय विधाओं का शास्त्र सीखने वाले) द्रावका मेटिसिक जब भारत में संस्कृत का अध्ययन कर रही थीं तब उन्हें अपने देश और गॉन्डलिम के बीच के इस प्राचीन संबंध के बारे में पता चला था.

इसके बाद अप्रैल 1999 में क्रोएशिया का पहला प्रतिनिधिमंडल भी गॉन्डलिम आया. इस 15 सदस्यीय संसदीय प्रतिनिधिमंडल के साथ भारत में क्रोएशिया के तत्कालीन राजदूत ज़ोरात एंड्रिक भी गॉन्डलिम आए थे. इस प्रतिनिधिमंडल ने गोवा-क्रोएशिया संबंध को और मज़बूत करने के बारे में तमाम पहलुओं का अध्ययन किया और विभिन्न संभावनाएं भी टटोली थीं. उसके बाद से गोवा आने वाला क्रोएशिया का कोई पर्यटक गॉन्डलिम आए बिना नहीं रहता. स्थानीय निवासी ब्रैज़ सिल्विरा इसकी पुष्टि करते हैं.