पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी सभी विपक्षों दलों को साथ लाकर एक बड़ी रैली करने की योजना बना रही हैं. इकनॉमिक टाइम्स के मुताबिक यह रैली लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा के खिलाफ राष्ट्रीय गठबंधन बनाने का रास्ता तय करने के उद्देश्य से आयोजित की जाएगी. बताया जा रहा है कि रैली दिसंबर के पहले हफ्ते में कोलकाता के ब्रिगेड परेड ग्राउंड में हो सकती है. इसके अलावा ममता बनर्जी डीएमके और सपा-बसपा द्वारा आयोजित चेन्नई और लखनऊ की रैलियों में भी भाग लेंगी.

तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख कुछ समय से खुद को भाजपा-विरोधी खेमे का सबसे प्रमुख नेता साबित करने की कोशिश में लगी हुई हैं. उनकी नई योजना को इसी कोशिश से जोड़ कर देखा जा रहा है. ब्रिगेड परेड ग्राउंड की क्षमता काफी ज्यादा है. इस मैदान में एक साथ 12 लाख से ज्यादा लोग इकट्ठा हो सकते हैं. केवल किसी बड़े राजनीतिक कार्यक्रम के चलते यहां रैली आयोजित की जाती है. खबर के मुताबिक यहां रैली कर ममता बनर्जी केंद्र में बनने वाली अगली सरकार में अपनी अहम भूमिका का प्रचार करना चाहती हैं.

हालांकि संभव है कि लेफ्ट पार्टियां उनके कार्यक्रम से दूर रहें. सीपीएम पहले ही इस रैली को लेकर इनकार कर चुकी है. पार्टी के महासचिव सीताराम येचुरी ने कहा था कि ममता बनर्जी का खुद को भाजपा-विरोधी पार्टियों के नेता के रूप में पेश करना पश्चिम बंगाल में लोकतंत्र की हत्या है. येचुरी ने कहा था, ‘हम राष्ट्रीय स्तर पर भाजपा के विरोधी हैं, और बंगाल में हम टीएमसी-विरोधी हैं.’

उधर, बंगाल को लेकर कांग्रेस का क्या रुख रहेगा यह भी अभी तक साफ नहीं है. हालांकि ममता की रैली को लेकर पार्टी ज्यादा उत्साह नहीं दिखा रही. कांग्रेस का मानना है कि अगर तीसरा मोर्चा बना तो इससे भाजपा को फायदा होगा. अखिल भारतीय कांग्रेस समिति के सदस्य और पश्चिम बंगाल प्रदेश कांग्रेस समिति के महासचिव ओम प्रकाश मिश्रा कहते हैं, ‘(ममता) बनर्जी का खुद को विपक्ष का चेहरा बताना उनकी अपनी कल्पना है. राष्ट्रीय स्तर पर ऐसा नहीं हो सकता. कांग्रेस के बिना वे कोई मोर्चा नहीं बना सकतीं.’